श्रीनगर गढ़वाल: NIT छोड़कर गए 900 छात्रों को बुलावा, वापस नहीं लौटे तो कार्रवाई होगी?

श्रीनगर गढ़वाल में एनआईटी के 900 छात्र कैंपस छोड़कर चले गए। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सूचित करने बाद छात्रों ने ये कदम उठाया है।

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आज श्रीनगर गढ़वाल का एनआईटी कैंपस खबरों में है। हर तरफ शिक्षा के स्तर की चर्चाएं आम हो गई हैं। उत्तराखंड के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 900 से ज्यादा छात्र संस्थान को छोड़कर अपने एपने घरों की तरफ चले गए। संस्थान के पास से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर तीन बीटैक छात्र घायल हो चुके हैं। इसके अलावा दो छात्राएं भी एक वाहन से टककराने की वजह से बुरी रह घायल हो गईं थी। छात्रों ने तब तक अपनी कक्षाओं का बहिष्कार करने की धमकी दी, जब तक कि उन्हें वर्तमान परिसर से कहीं और शिफ्ट नहीं किा जाता। आंदोलनकारी छात्रों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को इस परेशानी के समाधान के लिए खत भी लिखे हैं। इसके बाद 900 छात्र संस्थान छोड़कर चले गए।

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इस बीच प्रबंधन की नींद उड़ी हुई है। प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को ई-मेल किया है और वापसी का बुलावा भेजा है। इसके साथ ही अनुशासन का डर भी दिखाया गया है। किरकिरी होने के बाद राज्य सरकार ने गढ़वाल मंडल आयुक्त शैलेश बगोली को इस समस्या का समाधान करने का जिम्मा सौंपा है। संस्थान के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह ने इस बारे में मीडिया को कुछ खास जानकारियां दी हैं। उनका कहना है कि जो छात्र बिना बताए संस्थान से चले गए, उनके अभिभावकों को ई-मेल कर दिया गया है और अपने बच्चों को वापस संस्थान भेजने के लिए कहा गया है। उनका ये भी कहना है कि बिना अनुमति जाने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई होगी। साथ ही केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों को इस बारे में बता दिया गया है।

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सवाल ये है कि आगे क्या होगा ? देशभर में कुल मिलाकर 31 एनआइटी संस्थान हैं और इनकी रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर खड़ा है श्रीनगर का NIT..शिक्षा का हाल क्या है, ये तो साफ दिख रहा है लेकिन अब इस संस्थान के छात्र-छात्राओं ने स्थायी परिसर का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है। 19 दिनों तक कक्षाओं का बहिष्कार किया गया और 900 छात्र-छात्राएं संस्थान छोड़कर अपने घर चले गए। सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रहा है, ये भी देखिए।

NIT Uttarakhand

Help these students :) they need our support

The students of NIT Uttarakhand called off this week-long strike last year, 28 August 2017. As we were gulled by these administrators and officials. The efforts, hopes and dreams were curbed. We were clipped down. All we wanted was a place to call home, a campus.

But we were made victims of local politics.

The strike was called off with a prophecy, that we will be rammed by vehicles. And the darkest nightmare came true.

On October 3, 2018, two students Nupur Munda and Neelam were walking there a way to the labs(our campus is bifurcated in two parts, the students tried on NH-58 amidst speeding vehicles to commute between labs and classes). And were rammed by a speeding vehicle over the pavement. Lost consciousness, blood was all over. And just because we predicted this does not make this any easier for us to accept. Is this how it was supposed to go down? Is it mundane to students to be run over by speeding vehicles? Our careers and lives are being played around with! At the expense of local politics who are adherent at keeping us here for the "development" of this suburb. Neelam has been admitted at AIIMS Rishikesh. She had to be referred because of the inability of these suburban hospitals to deal with the situation. We here are devoid of exposure, medical facilities and what not. Dodging vehicles during daily commute has become a household chore.

Afraid for our lives and that of others and not wanting to walk on national highways for attending lectures students have unanimously decided to go on an indefinite strike. Though the hope of getting a campus seems to be fading into oblivion here we are simmering in the sun indefinitely. Though they are trying to curb our ageing but now that we have been seasoned and experienced this restlessness. These interrogations and interferences will only make us stronger. We are not recognised by our own state as a college of "National Importance". Investors meet mentioned in the appraisal of the state mentioned Uttarakhand as a state with IIT Roorkee and " Nit Srinagar"(We are Nit Uttarakhand, not Nit Srinagar). So all we expected was recognition and the importance that we deserve and here we are struggling for daily necessities and safe path to walk on.

Sent by a Student of NITUK

You can search it on twitter as:

#DestinationUttarakhand

#CampusForNITUK

#JusticeForNeelam

#prayforneelam

Hope you get justice - Team TEB :)

Posted by The Engineer Bro on Saturday, October 6, 2018


Uttarakhand News: srinagar garhwal nit managment call to 900 students

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