चमोली: जनपद चमोली के नारायणबगड़ क्षेत्र के डुंग्री गांव के रहने वाले ITBP जवान प्रदीप कुमार की ड्यूटी से घर लौटते समय दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। बताया गया कि शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे पठानकोट रेलवे स्टेशन के पास हुए ट्रेन हादसे में उन्होंने जान गंवा दी। प्रदीप कुमार की उम्र करीब 35 वर्ष थी और वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 23वीं बटालियन, सीमा द्वार देहरादून में तैनात थे।
ITBP jawan dies in Pathankot train accident
जानकारी के अनुसार, प्रदीप कुमार अमरनाथ यात्रा की ड्यूटी पूरी करने के बाद वापस अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पठानकोट में हुए ट्रेन हादसे ने उनके परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया। जवान की मौत की खबर जैसे ही परिजनों और ग्रामीणों तक पहुंची, डुंग्री गांव समेत पूरे नारायणबगड़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को प्रदीप कुमार का पार्थिव शरीर नारायणबगड़ स्थित पैतृक घाट पहुंचा। तिरंगे में लिपटे अपने लाल को अंतिम दर्शन के लिए सामने देखकर परिजन भावुक हो उठे। मां-पिता और अन्य परिजनों के विलाप से पूरा माहौल गमगीन हो गया। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रवासी भी पहुंचे।
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
23वीं बटालियन ITBP के कमांडेंट रिंकू सिंह के नेतृत्व में जवानों ने प्रदीप कुमार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। पुलिस और प्रशासन की ओर से भी दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान स्थानीय प्रशासन की ओर से तहसीलदार राजेंद्र सिंह बिष्ट भी मौजूद रहे।
पूरे नारायणबगड़ क्षेत्र में शोक
प्रदीप कुमार के असमय निधन से डुंग्री गांव ही नहीं, बल्कि पूरे नारायणबगड़ क्षेत्र में शोक की लहर है। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने जवान के निधन को परिवार और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। विधायक भूपाल राम टम्टा, ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला समेत यशपाल सिंह नेगी, नरेंद्र रावत, वीर भरत सिंह, जय नंद सती और दलीप नेगी ने जवान को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश की सेवा में समर्पित जवान का इस तरह असमय चले जाना बेहद दुखद है। प्रदीप कुमार ने देश सेवा में अपना योगदान दिया और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
देश सेवा से लौटते समय मिली दर्दनाक मौत
प्रदीप कुमार अमरनाथ यात्रा में ड्यूटी पूरी कर अपने घर लौट रहे थे। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही पठानकोट में हुए ट्रेन हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। तिरंगे में लिपटे जवान को अंतिम विदाई देते समय पूरा क्षेत्र भावुक नजर आया। परिवार ने अपना बेटा खोया, वहीं क्षेत्र ने देश की सेवा करने वाला एक जांबाज जवान खो दिया।