उत्तराखंड चमोलीNanda Devi Badi Jat Pilgrimage Faces Controversy in Chamoli

नंदा देवी बड़ी जात: वांण गांव में आमने-सामने प्रशासन और समिति, DM ने जारी की चेतावनी

Uttarakhand News: नंदा देवी बड़ी जात यात्रा को लेकर विवाद बढ़ गया है। वांण गांव में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को लेकर डीएम ने आयोजन समिति को चेतावनी दी, समिति ने जांच की मांग की।

Nanda Devi Raj Jat Yatra: Nanda Devi Badi Jat Pilgrimage Faces Controversy in Chamoli
Image: Nanda Devi Badi Jat Pilgrimage Faces Controversy in Chamoli (Source: Social Media)

चमोली: सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा को लेकर वांण गांव में श्रद्धालुओं के प्रवेश और संभावित भीड़ को लेकर विवाद सामने आया है। ग्राम प्रधान नंदुली देवी ने प्रशासन को पत्र भेजकर आशंका जताई थी कि बड़ी जात के दौरान मां राजराजेश्वरी की डोली के साथ अन्य डोलियां और बड़ी संख्या में श्रद्धालु वांण पहुंच सकते हैं। ग्राम प्रधान के अनुसार, इससे गांव में अव्यवस्था और कानून व्यवस्था से जुड़ी स्थिति पैदा होने की आशंका है।

Nanda Devi Badi Jat Pilgrimage Faces Controversy in Chamoli

ग्राम प्रधान की शिकायत का हवाला देते हुए चमोली जिलाधिकारी गौरव कुमार ने 4 सितंबर को नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा। पत्र में कहा गया कि यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और डोलियों के वांण पहुंचने से यदि अव्यवस्था या अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी बड़ी जात आयोजन समिति की होगी। डीएम ने समिति अध्यक्ष से ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के साथ बातचीत कर आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालने को कहा।

कानून व्यवस्था बिगड़ी तो कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि यात्रा के दौरान यदि शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित होती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगीइस चेतावनी के बाद बड़ी जात यात्रा को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति के बीच मतभेद और चर्चा का विषय बन गए हैं।

कानून व्यवस्था बिगड़ी तो कार्रवाई की चेतावनी

डीएम के पत्र के जवाब में आयोजन समिति अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को प्रशासन को तीन पेज का पत्र भेजा। समिति का कहना है कि बड़ी जात का आयोजन महीनों पहले सिद्धपीठ कुरूड़ के पुजारियों, डोली और मंदिर समिति की सहमति से विधिवत तय किया गया था। आगे पढ़िए..

ये भी पढ़ें:

समिति अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि गौड़ पुजारियों का एक गुट, जो राजजात समिति नौटी से भी जुड़ा है, यात्रा में अवरोध पैदा करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसे कथित तौर पर एक सोची-समझी कार्ययोजना बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

समिति ने कहा- लगातार समन्वय के प्रयास किए

कर्नल हरेंद्र सिंह रावत के अनुसार, बड़ी जात आयोजन समिति की ओर से शासन-प्रशासन, राजजात समिति और अन्य संबंधित समितियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लगातार प्रयास किए गए हैं। समिति ने कहा कि वह प्रशासन के साथ बातचीत और समन्वय के लिए तैयार है, ताकि यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

लाटू देवता मंदिर का भी दिया हवाला

आयोजन समिति ने अपने जवाब में वांण गांव में स्थित लाटू देवता मंदिर का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, लाटू देवता को नंदा देवी का धर्मभाई माना जाता है और वांण स्थित उनका पौराणिक मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। समिति अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे में वांण में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक या आपत्ति का विषय धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
समिति ने कहा कि यात्रा के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना और श्रद्धालुओं को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। आयोजन समिति ने प्रशासन से मांग की है कि यात्रा मार्ग के दुर्गम और निर्जन पड़ावों पर समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

कैलाश यात्रा पर बढ़ी निगरानी

सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा देवी की तीन डोलियां कैलाश गमन के लिए रवाना हो चुकी हैं। ऐसे में अब यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, दुर्गम पड़ावों पर व्यवस्थाओं और वांण से लेकर होमकुंड तक प्रशासन की तैयारियों पर नजर रहेगी। फिलहाल बड़ी जात यात्रा को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति के बीच विवाद का समाधान बातचीत और समन्वय के जरिए निकालने की कोशिश जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वांण में श्रद्धालुओं के प्रवेश और यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर क्या सहमति बनती है।