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Image: Research about kedarnath dham

केदारनाथ पर वैज्ञानिकों ने की बड़ी रिसर्च..400 साल बर्फ में दबे रहने के बाद भी सुरक्षित था

वास्तव में बाबा केदारनाथ के भक्तों के लिए ये खबर वास्तविकता और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम है। पढ़िए बड़ी रिसर्च

इस वैज्ञानिक रिपोर्ट को जानकर आप बाबा केदारनाथ की असीम शक्ति का अहसास कर पाएंगे। वैज्ञानिकों की मानें तो केदारनाथ मंदिर 400 साल तक बर्फ में दबा रहा था, लेकिन वो सुरक्षित बचा रहा। वैज्ञानिकों ने 13वीं से 17वीं शताब्दी तक की ये बातें बताई हैं। उनके मुताबिक एक छोटा हिमयुग यानी (Little Ice Age) उस दौरान आई थी। इस हिमयुग में हिमालय का एक बड़ा हिस्सा बर्फ के अंदर दब गया था। आइए आपको इस बारे में पूरी कहानी बताते हैं। वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बात में कोई भी हैरानी नहीं है कि केदारनाथ मंदिर 2013 में आई आपदा के दौरान सुरक्षित रहे। उन्होंने तो ऐसी बात बताई हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी भी होती है। देश की बड़ी वेबसाइट में शुमार india.com में साल 2017 के दौरान इस बारे में कुछ खास बातें बताई गई हैं। देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट के हिमालयन जियोलॉजिकल विभाग के वैज्ञानिक विजय जोशी ने इस बारे में कुछ खास बातें बताईं थीं। आगे जानिए

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उन्होंने कहा कि 400 साल तक केदारनाथ के मंदिर के बर्फ के अंदर दबे रहे थे। इसके बावजूद यह मंदिर सुरक्षित रहा, लेकिन ये बर्फ जब पीछे हटी तो उसके हटने के निशान मंदिर में आज भी मौजूद हैं। इन निशानों की स्टडी वैज्ञानिकों ने की और इसके आधार पर ही ये निष्कर्ष निकाला है। वैज्ञानिक कहते हैं कि 13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच 400 साल का एक छोटा हिमयुग आया। इसमें हिमालय का एक बड़ा क्षेत्र बर्फ के अंदर दब गया था। केदारनाथ मंदिर ग्लेशियर के अंदर नहीं बल्कि बर्फ के ही दबा था। रिस्च के मुताबिक मंदिर की दीवार और पत्थरों पर आज भी इसके निशान हैं। जब 400 साल तक मंदिर बर्फ में दबा रहा होगा तो सोचने वाली बात है कि मंदिर ने बर्फ और पत्थरों की रगड़ कितनी झेली होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंदिर के अंदर भी इसके निशान दिखाई देते हैं।

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बाहर की ओर दीवारों के पत्थरों की रगड़ दिखती है तो अंदर की ओर पत्थर समतल हैं, जैसे उनकी पॉलिश की गई हो। कहा जाता है कि विक्रम संवत् 1076 से 1099 तक राज करने वाले मालवा के राजा भोज ने इस मंदिर को बनाया था। कुछ लोग ये भी कहते हैं कि ये मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनाया था। हालांकि गढ़वाल ‍विकास निगम अनुसार मौजूदा मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनवाया था। यानी छोटा हिमयुग का दौर जो 13वीं शताब्दी में शुरू हुआ था उसके पहले ही ये मंदिर बन चुका था। वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने केदार धाम की लाइकोनोमेट्री डेटिंग भी की थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे स्थान में मंदिर बनाने वालों की एक कला थी। उस दौरान ऐसा सुरक्षित मंदिर बनाया कि आज तक उसे कुछ नुकसान नहीं हुआ। वैज्ञानिक भी इस शक्ति को प्रणाम करते हैं।

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