देवभूमि की वो जगह, जहां पांडवों को जिंदा जलाने की कोशिश हुई..वैज्ञानिक भी यहां हैरान हैं

उत्तराखंड में रहस्यों क बात करें, तो वो अनगिनत हैं। इन्हीं अनगिनत रहस्यों में से एक है लाखामंडल...जहां आकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।

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उत्तराखंड में मौजूद इस मंदिर प्रांगण में लगातार मिलती मूर्तियों से पुरातत्वविद भी हैरान हैं। ASI की ओर से की गई वैज्ञानिक खोज में यहां बड़ी संख्या में वास्तु संरचनाओं के खंड, शिवलिंग और मूर्तियां प्राप्त हुई। इनमें पांचवीं-छठी सदी के भी शिलाखंड मिले हैं। देहरादून से करीब 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इलाके में लाखामंडल है। जो यमुना नदी के तट पर स्थित है।इस मंदिर की कई मान्यताएं है कि महाभारत काल में यहां पांडवों को जलाकर मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह यानी लाख का घर बनाया था। कौरवों ने अज्ञातवास के दौरान पांडवों को लाक्षागृह में जलाकर मारने का षडयंत्र रचा था, वो लाक्षागृह लाखामंडल में ही था। इसकी कुछ खास बातें जानिए।

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बताया जाता है कि लाखामंडल में वो एतिहासिक गुफा आज भी मौजूद है, जिससे होकर पांडव सकुशल बाहर निकल आए थे। इसके बाद पांडवों ने 'चक्रनगरी' में एक महीवा बिताय वो चक्रनगरी आज के दौर में चकराता कहलाती है लाखामंडल के अलावा हनोल, थैना और मैंद्रथ में खुदाई के दौरान मिले पौराणिक शिवलिंग मिले हैं। ये बात गवाह है कि इस क्षेत्र में पांडवों का वास रहा है। लाथामंडल दिल को लुभाने वाली गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। माना जाता है कि यहां मंदिर में प्रार्थना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। यहां पर खुदाई करते वक्त विभिन्न आकार के और विभिन्न ऐतिहासिक काल के शिवलिंग मिले हैं। लाखामंडल के प्रागंण में मौजूद शिवलिंग के सामने दो द्वारपाल पश्चिम की तरफ मुंह करके खड़े हैं। इन द्वारपालों के बारे में भी बहुत कुछ कहा जाता है।

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माना जाता है कि कोई भी मृत्यु को प्राप्त किया हुआ इंसान इन द्वारपालों के सामने रख दिया जाता था तो पुजारी द्वारा अभिमंत्रित जल छिड़कने पर वो जीवित हो जाता था। निसंतान दंपति के लिए ये मंदिर किसी वरदान से कम नहीं है। लाखामंडल में बने शिवलिंग का जब भक्त जलाभिषेक करते हैं तो खुद की तस्वीर साफ दिखती है। लोगों का मानना है कि इस शिवलिंग पर अपनी तस्वीर देखने मात्र से सारे पाप कट जाते हैं। इस मंदिर की एक और खास बात ये है कि इसके अंदर एक चट्टान पर पैरों के निशान मौजूद हैं, जिन्हें मां पार्वती के पैरों के निशान माना जाता है। मंदिर के अंदर भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश, भगवान विष्णु और हनुमान जी की मूर्तियां भी स्थापित हैं। भगवान शिव को आदि और अंत का देवता का जाता है। उत्तराखंड में प्रकृति की वादियों में बसा ये एक ऐसा मंदिर है, जो शिव की महिमा के लिए जाना जाता है।


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