उत्तराखंड को इस तरह बेचने की तैयारी थी, सामने आया विस्फोटक ऑडियो का तीसरा पार्ट

उत्तराखंड में सरकार गिराने की साजिश का फिर से पर्दाफाश हुआ है। अब एक और ऑडियो सामने आया है। पहले दो ऑडियो आ चुके हैं और अब ये तीसरा ऑडियो भी सुनिए।

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सुनिए...हो क्या रहा है ? यूं समझ लीजिए कि कुछ तथाकथित पत्रकारों का गोलमेज सम्मेलन सम्मेलन चल रहा है। उस गोलमेज सम्मेलन में बीच टेबल पर उत्तराखंड को रखा हुआ है। खाने-खिलाने की पूरी व्यवस्था हो चुकी है और अब उत्तराखंड को बेचना है। बेचना कैसे है ? इसकी प्लानिंग हो रही है। एक और ऑडियो क्लिप राज्य समीक्षा के हाथ लगा है। यकीन मानिए कान फट पड़ेंगे आपके भी..इस ऑडियो क्लिप में समाचार प्लस के मुखिया उमेश जे कुमार, समाचार प्लस के ही एक बड़े अधिकारी शशांक बंसल, एक पत्रकार अनुरंजन झा और उसी आयुष गौड़ की आवाज़ है, जिसने उमेश जे कुमार पर खुद को टपकाने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इससे पहले दो ऑडियो तो आप सुन ही चुके होंगे। अब बारी इस तीसरी ऑडियो क्लिप की है..जरा ये भी सुन लीजिए।

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आप भी हैरान रह जाएंगे कि किस तरह से उत्तराखंड में अस्थिरता लाने की कोशिश हो रही थी। बात धंधे की हो रही है, पत्रकारिता की नहीं। धंधा किस चीज का है ? पहले स्टिंग करो और फिर उसे मोनेटाइज़ करो। मोनेटाइज़ करो यानी बेच दो। पत्रकारिता के उसूल मानों इस ऑडियो क्लिप में बिक से रहे हैं। कॉर्पोरेट पार्ट, पॉलिटिकल पार्ट, बिल्डर्स पार्ट, मेडिकल कॉलेज पार्ट...हर पार्ट की बात हो रही है। कुछ मेन प्रोजक्ट की बात हो रही है, जो कि सूटकेस में बंद है। फंसने, फंसाने से लेकर गृहदशा की बात चल रही है। पहले आप ये सुन लीजिए और जहां समझ में ना आए तो वीडियो के नीचे पढ़िए कि बातें क्या क्या हो रही हैं।

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अनुरंजन- मोनेटाइज ये नहीं कर सकता, ये मोनेटाइज करेगा तो मर जाएगा
आयुष- मैं फंस जाऊंगा
अनुरंजन- कहानी फिनिश
आयुष- शशांक सर जो कह रहे हैं, वो बात मैने पहले बोली कि जो काम हम कर रहे हैं अभी
अनुरंजन- हां हां
आयुष- उसका कोई फायदा नहीं हो रहा हमें...मुझे भी खराब लगता है कि मेरे जो बॉस हैं, भले ही बड़े भाई हैं
अनुरंजन-- हां हां
आयुष- उनका जो पैसा लगता है...भले ही काम हमने 100 परसेंट करके दिया, लेकिन वो मेनेटाइज नहीं हो पाया
उमेश- अनुरंजन भाई!
अनुरंजन-- सुन रहा हूं सर
उमेश- हैं ना, तो वो ज़रा देख लो
आयुष- सर काम एक तरह का इन्वेस्टिगेशन है जो दो भागों में बंटा है..
अनुरंजन---हूं..हूं
आयुष- एक कॉरपोरेट है दूसरा पॉलिटिकल पार्ट है...कॉरपोरेट में तमाम चीजें आती हैं, मेडिकल कॉलेज, बिल्डर्स
अनुरंजन-- हम्म हम्म
आयुष- तो जो पॉलिटिकल है उसमें तो हम लोग स्टैंड ले भी नहीं सकते, वो तो अल्टीमेटली भैया लेंगे
अनुरंजन- हम्म हम्म
आयुष- और जो हमारे मेन प्रोजेक्ट सूटकेस में बंद हैं, उसमें क्या है कि 70 परसेंट पॉलिटिकल हैं, 30 परसेंट आपका कॉरपोरेट है, तो उसको हम छू नहीं सकते ना
उमेश- नहीं, तो डिस्कस करना पड़ेगा ना...वी विल नॉट
आयुष- नहीं सर वो तो आप लोग बड़े लोगों के लेवल का है ना
उमेश- नहीं नहीं हम साथ बैठकर डिस्कस कर रहे हैं
आयुष- जी
उमेश- हर चीज का एक एंगल होता है..सवाल ये है कि हम उसको कैसे भुना पाते हैं
आयुष- जी
उमेश- बहुत बढ़िया काम हुआ है...लेकिन..यार ये वाला एंगल छोड़ देना...इस एंगल से चीजें कवर कर लो, इसको हम भुना पाएंगे
उमेश-- अब टीम थोडी बड़ी हो गई है...हम खुलकर डिस्कस कर सकते हैं... वो करो...और
आयुष--पर बात ये है कि मैंने तो अपना काम कर लिया पूरा
अनुरंजन- आप भी फंस गए ना
आयुष- मैंने काम कर लिया पूरा, लेकिन अब वो चीज आगे सिचुएशन के हिसाब से मैनेज नहीं हो पा रही...हमारी गृहदशा ठीक नहीं चल रही..या किसी की गृहदशा ठीक चल रही है।
पत्रकारिता का सबसे बड़ा हथियार है स्टिंग, जब उसी स्टिंग का इस्तेमाल अपने निज़ी स्वार्थ के लिए हो रहा हो, तो सवाल उठते हैं।


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