DM मंगेश घिल्डियाल का मंगल अभियान..केदारनाथ में स्वरोजगार, डेढ़ करोड़ की कमाई!

केदारनाथ धाम में इस साल यात्रा के साथ साथ स्वरोजगार का फॉर्मूला भी सुपरहिट साबित हुआ है। जानिए कैसे

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केदारनाथ धाम में इस साल कई बातें ऐसी हुई हैं, जो अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड हैं। पहली बात तो ये है कि केदारनाथ धाम में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या 7 लाख के पार पहुंच गई, जो कि अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड है। इसके अलावा दूसरी बात ये है कि इस साल केदरनाथ धाम में स्वरोजगार ने भी अलग ही रिकॉर्ड तैयार किया है। जी हां इस साल यात्रा सीजन के दौरान स्थानीय उत्पादों से प्रसाद तैयार किया गया और करीब डेढ़ करोड़ रुपये में बेचा गया। डीएम मंगेश घिल्डियाल की इस पहल से जिला प्रशासन भी उत्साहित है। इस यात्रा सीजन के दौरान केदारनाथ स्थानीय उत्पादों से ही प्रसाद तैयार किया गया था और श्रद्धालुओं को बेचा गया। आपको जानकर खुशी होगी कि इस बार प्रसाद से स्थानीय महिलाओं ने 1.30 करोड़ रुपये की कमाई की है।

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रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने आगामी यात्रा सीजन में इस कमाई को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस साल केदार यात्रा शुरू होने से पहले ही जिला प्रशासन ने ये बड़ा फैसला लिया था। स्थानीय उत्पादों से प्रसाद तैयार किया गया और यात्रियों को देने का फैसला लिया गया। इस काम में श्री बदरी-केदार मंदिर समिति ने भी जिला प्रशासन का साथ दिया। दो सौ स्वयं सहायता समूहों ने प्रसाद बनाने का काम शुरू किया था। 29 अप्रैल 2018 को केदारनाथ के कपाट खुले और सिर्फ चार दिन में ही 10 लाख रुपये का प्रसाद बिक गया। सोनप्रयाग में स्टोर बनाया गया और वहां से प्रसाद को केदारनाथ धाम तक पहुंचाया गया। कुल मिलाकर प्रसाद के दो लाख पैकेट तैयार किए गए थे और सारे के सारे बिक गए।

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रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य केदारघाटी में रोजगार को बढ़ावा देना है। केदारघाटी में स्थानीय महिलाएं 200 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। अगले साल यात्रा सीजन में इस अभियान को और भी बेहतर तरीके से चलाया जाएगा। रिंगाल की टोकरी, कपड़े के थैले और कागज के पैकेट में प्रसाद दिया जाता है। कागज के पैकेट में प्रसाद की कीमत 30 रुपये, कपड़े के बैग में 65 रुपये और रिंगाल की टोकरी में 100 रुपये है। खास बात ये भी है कि इस पहल के बाद से केदारघाटी में चौलाई की भी मांग बढ़ गई है। ये वास्तव में एक बेहतरीन काम है, जिसकी तारीफ होनी चाहिए। जिला प्रशासन और बदरी-केदार मंदिर समिति को इस सार्थक पहल के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।


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