देहरादून में सिकुड़ रही है 250 किलोमीटर ज़मीन, 8 रिक्टर स्केल के भूकंप का खतरा!

अगर आप देहरादून में रह रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी दिल्ली के अध्ययन में हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं।

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देहरादून पर 8 रिक्टर स्केल के भूकंप का खतरा है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि देश में भूकंप और धरती में होने वाली हलचलों पर रिसर्च करने वाली सबसे बड़ी संस्था का दावा है। जी हां नेनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की रिसर्च में ये हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं। इस रिसर्च में एक एक बात आपको भी समझनी चाहिए कि आखिर देहरादून के 250 किलोमीटर क्षेत्रफल में क्या हो रहा है। रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि देहरादून से टनकपुर के बीच करीब 250 किलोमीटर क्षेत्रफल की जमीन सिकुड़ती जा रही है। हर साल करीब 18 मिलीमीटर की दर से धरती सिकुड़ती जा रही है। सेंटर के निदेशक डॉ.विनीत गहलोत का कहना है कि साल 2013 से 2018 के बीच देहरादून के मोहंड से टनकपुर के बीच करीब 30 जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम लगाए गए थे।

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जीपीएस के माध्यम से पता चला है कि ये पूरा भूभाग हर साल 18 मिलीमीटर की दर से सिकुड़ता जा रहा है। इस सिकुड़न की वजह से धरती के भीतर ऊर्जा का का जबरदस्त भंडार बन रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ऊर्जा ही चिंता का सबसे बड़ा सबब है, जो कभी भी सात या फिर आठ रिक्टर स्केल के भूकंप के रूप में बाहर निकल सकती है। रिसर्च में बताया गया है कि इस पूरे क्षेत्र में बीते 500 से ज्यादा सालों से कोई शक्तिशाली भूकंप नहीं आया है। एक वक्त ऐसा भी आएगा, जब धरती की सिकुड़न आखिरी स्तर पर होगी। उस वक्त कहीं भी भूकंप के रूप में ये ऊर्जा बाहर निकलेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वहां धरती हर साल 21 मिलीमीटर की दर से सिकुड़ रही थी और इस वजह से साल 2015 में 7.8 रिक्टर स्केल का बड़ा भूकंप आया था।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि ये कहना मुश्किल है कि धरती के सिकुड़ने का आखिरी वक्त कब आएगा लेकिन इतना जरूर है कि जीपीएस और बाकी अध्ययन एक बड़ी चेतावनी दे रहे हैं। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत का कहना है कि 250 किलोमीटर का ये क्षेत्र भूकंपीय ऊर्जा का लॉकिंग जोन बन गया है। सबसे ज्यादा लॉकिंग जोन चंपावत, टिहरी-उत्तरकाशी क्षेत्र, धरासू बैंड और आगराखाल में पाए गए हैं। इसलिए सावधान रहने की बेहद जरूरत है। वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि ये ऊर्जा 8 रिक्टर स्केल तक के विनाशकारी भूकंप में तब्दील हो सकती है। फिलहाल ये वैज्ञानिकों की रिसर्च है, जो कि आने वाले वक्त के लिए एक चेतावनी की तरह साबित हो सकती है। देखना है कि आगे क्या होता है।


Uttarakhand News: warning for dehradun and uttarakhand

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