खतरे में उत्तराखंड की शान नैनी झील, वैज्ञानिकों ने दी भूकंप की वॉर्निंग

खतरे में उत्तराखंड की शान नैनी झील, वैज्ञानिकों ने दी भूकंप की वॉर्निंग

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विश्व विख्यात पर्यटन स्थल नैनी झील को लेकर वैज्ञानिकों ने जताई है। इसे लेकर वैज्ञानिकों ने हैरान कर देने वाली रिपोर्ट दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि, हिमालयी क्षेत्र में भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। इसके मद्देनजर आगाह किया है कि झील के भूकंपीय जोड़ की सक्रियता का आकलन किया जाए। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस जोड़ की दरार फैली तो पानी भूगर्भ में समा सकता है। तमाम भूगर्भ शास्त्री कहते हैं कि नैनी झील भूकंपीय जोड़ पर बनी है। इसके बाद इसका अस्तित्व खत्म हो गया था। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी यूएनडीपी के बैनर तले राजभवन में ‘साइंटिफिक एंड टेक्नोलोजिकल इंटरवेंशन टु सेव नैनी लेक’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विज्ञानियों ने कहा कि तत्काल नैनी झील का मौजूदा स्टेटस पता कराया जाए। अमर उजाला में भी इस खबर को प्रमुखता से जगह दी गई है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि नैनीताल क्षेत्र का तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। इसके साथ ही नैनी झील का पानी 18 फिट कम हो गया। हेमवंती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एसपी सिंह ने भी इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभी इस पर कोई नोटिस नहीं ले रहा है। लेकिन ध्यान रखना जरूरी है। इस मौके पर सूखा ताल चर्चा का विषय रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया ने झरने सूख रहे हैं और ये चिंता का सबब है। इन झरनों से भी नैनी झील रिचार्ज होती है। सभी ने एक सुर में चेताया कि तलझट हटाने के नाम पर नैनी झील के तल पर ड्रेजिंग ना कराई जाए। ये भूकंपीय प्लेटों पर बनी है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने वर्षा जल संचयन और बारिश के पानी को सहेजने का मशविरा दिया गया। झील के कैचमेंट एरिया की जूलोजिकल स्टडी कराने का मशविरा दिया गया।

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इस पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घोषणा की है कि ‘हिल साइड सेफ्टी कमेटी’ को फिर से तैयार किया जाएगा। ये कमेटी साल 1930 में बनी थी। ब्रितानी हुकूमत के दौरान पहाड़ों पर भूस्खलन, झीलों, झरनों की मॉनीटरिंग के लिए इस कमेटी को तैयार किया गया था। बाद में ये कमेटी समाप्त हो गई। अब आप ये वीडियो भी देखिए।

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Uttarakhand News: Alert for nainital lake

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