Video: उत्तराखंड पुलिस की महिला जवान, जो अपनी सैलरी से 30 गरीब बच्चों को पढ़ा रही हैं

कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं, जिनकी वास्तव में जितनी तारीफ करें, उतना कम है। आज हम आपको उत्तराखंड पुलिस की ऐसी ही महिला कांस्टेबल के बारे में दिखा रहे हैं।

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वर्दी को पहनने वाले इंसान ही तो हैं..खाकी के पीछे भावनाएं ही हैं, इंसानियत ही है और नेकदिली ही है। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी से रू-ब-रू कराने की कोशिश कर रहे हैं, जो सच्ची है और समाज के लिए एक प्रेरणा है। आम तौर पर इंसान नौकरी करता है और अपने लिए कमाता खाता है। लेकिन क्या आपने कभी किसी और लिए जीकर देखा है? यकीन मानिए बड़ा सुकून मिवता है, जब आप एक गरीब घर के बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ले आएं। वैसे भी शिक्षा की मुस्कान से बेहतर क्या होगा? उत्तराखंड के चंपावत जिले में उत्तराखंड पुलिस की महिला कांस्टेबल सविता तैनात हैं। पुलिस की व्यस्त ड्यूटी से जितना भी वक्त मिलता है, सविता उसे गरीब बच्चों को पढ़ाने में बिता देती हैं। अपने खर्चे पर सविता इन गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ा रही हैं।

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कहते हैं कि किसी समाज को सुधारने में शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार होती है। सविता बनबसा थाने में तैनात हैं। बनबसा नगर पंचायत के खुले आसमान में ही सविता कूड़ा बीनने वाले इन बच्चों को पढ़ा रही हैं। ये मुहिम लगातार बढ़ रही है और मिना बाज़ार तक पहुंच चुकी है। अपनी सविता दीदी से मिलने के लिए हर बच्चा उतावला रहता है। आज 30 से ज्यादा बच्चों को सविता अपने खर्चे से पढ़ा रही हैं। ज़रा सोचिए कि सविता के पास से में खाने और कमाने के लिए क्या बचता होगा ? सविता की इस पहल की स्थानीय लोग भी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। नेटवर्क 18 द्वारा तैयार किया गया ये वीडियो देखिए।

Good Work CPT

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उत्तराखंड के चम्पावत जिले में Uttarakhand Police की महिला कांस्टेबल #सविता_कोहली अपनी व्यस्त ड्यूटी से वक्त निकालकर अपने खर्च पर बच्चों को शिक्षा दे रही है। इतना ही नहीं स्कूल तक नहीं पहुंचने वाले बच्चों को वो निःशुल्क पढ़ा रही हैं।

आपको बता दें कि सीमांत बनबसा के नगर पंचायत परिसर के खुले आसमान के नीचे बच्चों को पढ़ा रही सविता कोहली बनबसा थाने में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। सविता ने अपनी मेहनत और लगन से कूड़ा चुनने वाले इन बच्चों की तकदीर बदल दी है। अब इन बच्चों के हाथ में कूड़े की थैली की जगह कॉपी-किताबों ने ले ली है। सविता की यह मुहिम मिना बाजार में बसे झुग्गी झोपड़ी के बच्चों तक पहुंची, तो कारवां बढ़ता चला गया। अब 30 से ज्यादा बच्चे किताबी अक्षर ज्ञान से रूबरू हो रहे हैं। सविता कोहली की इस पहल की स्थानीय लोग भी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।

(News Courtesy News18)

Posted by Uttarakhand Police on Friday, October 26, 2018


Uttarakhand News: story of uttarakhand police constable savita

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