उत्तराखंड से भारत-नेपाल संबंधों को मिली नई शुरुआत, छारछुम में बनेगा पहला मोटर पुल

उत्तराखंड से भारत और नेपाल के बीच नए संबंधों की शुरुआत होने जा रही है। इसके लिए तल्ला छारछुम में पहला मोटर पुल तैयार किया जा रहा है।

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जल्द ही भारत नेपाल के संबंधों को एक नया आयाम मिलने जा रहा है। इस नए आयाम की शुरुआत उत्तराखंड से होने जा रही है। उत्तराखंड से भारत और नेपाल के यातायात और व्यापारिक सम्बन्धों को बढ़ावा देने के मकसद से नई पहल हो रही है। जल्द ही काली नदी पर मोटर पुल का निर्माण किया जाएगा। ये पुल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से लगी नेपाल सीमा पर बनने वाला पहला मोटर पुल होगा। जो बलुवाकोट और छारछुम के बीच तल्ला छारछुम में बनने जा रहा है। जिसके लिए टेंडर भी हो चुके हैं। भारत सरकार की मदद से 110 मीटर लंबा मोटर पुल बनाया जाना है। इसके लिए भारत सरकार ने 15 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया है। भारत और नेपाल के बीच मोटर पुल निर्माण की मांग दोनों देशों के सीमांत में रहने वाले लोग 50 सालों से उठा रहे हैं।

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इस मोटर पुल से भारतीय क्षेत्र का पिथौरागढ़-तवाघाट राजमार्ग और नेपाल का दाप क्षेत्र जुड़ेगा। दोनों देशों के बीच आवागमन सुगम होगा। व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। इस पुल की वजह से दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते और कारोबार को भी मजबूती मिलेगी। इस पुल के बनने के बाद पिथौरागढ़ जिले में तल्ला छारछुम के पास से भारत और नेपाल के बीच यातायात शुरु हो सकेगा। मोटर पुल को लेकर अभी मूल्यांकन का काम चल रहे है जिसके बाद ही इसके निर्माण का काम शुरु किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड अस्कोट द्वारा पुल का निर्माण किया जाएगा। इसके निर्माण के लिए लिए नेपाल प्रशासन से पहले ही एनओसी मिल चुकी है। इस मोटर पुल के बनने से भारत नेपाल के बीच आवागमन और आसान हो जाएगा।

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बहरहाल भारत अपने विदेश नीति पर बहुत तेजी से कार्य कर रहा है ऐसे में सीमांत उत्तराखंड और नेपाल के बीच में यातायात की सुगमता भारत नेपाल के व्यापारिक संबंधों में नए आयाम गढ़ सकता है। बता दे कि काली नदी पर बनने वाले पुल की सीमा पर रहने वाले लोग लंबे वक्त से मांग कर रहे थे। ताकि गाड़ियों की आवाजाही हो सके। बता दे कि भारत-नेपाल के बीच जिले में लगभग 180 किमी लंबी सीमा के दायरे में 6 झूला पुल हैं। इससे पहले झूलाघाट में दोनों देशों को जोड़ने वाले झूला पुल को मोटर पुल बनाने का प्रस्ताव था। लेकिन ये प्रस्ताव हकीकत में तब्दील नहीं हो सका। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस पुल का निरीक्षण किया था। और लंबे वक्त तक इस मोटर पुल के बारे में चर्चा भी चली। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। लेकिन अब यहा रहने वाले लोगों का इंतजार खत्म होने जा रहा है।


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