देवभूमि के पंचकेदारों में तृतीय केदार, ये है दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

देवभूमि के पंचकेदारों में तृतीय केदार, ये है दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

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भारत देवभूमि है। यहां करोड़ों देवी देवताओं के प्राचीन मान्यताओं के मंदिर हैं, वहीँ भारत में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवान शिव के बहुत से प्राचीन मंदिर हैं, जहाँ भोले के भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन आज हम आपको एक इसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी गिनती दुनिया के सबसे ऊँचे शिवालय में होती है। करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शिवालय को विश्व का सबसे ऊंचा शिवालय माना जाता है। इस बेहद ही खास सबसे ऊंचा शिवालय देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। इस जिले में तुंगनाथ नामक पहाड़ पर स्थित ये शिवालय तुंगनाथ मंदिर के नाम से मशहूर है। तकरीबन 1000 साल पुराना तुंगनाथ मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर के बीचों-बीच स्थित है। इसके अलावा भी इस मंदिर की कई खास बातें हैं।

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ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित इस भव्य और प्राचीन मंदिर को देखने के लिए हर साल भारी तादात में तीर्थयात्री और पर्यटक यहां आते हैं। इस मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में महाभारत के युद्ध के दौरान हुए विशाल नरसंहार के बाद भगवान शिव पांडवों से रूष्ट हो गए थे। तब भगवान शिव की प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कर उनकी उपासना की थी। इस मंदिर को लेकर एक और मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने जब रावण का वध किया तब खुद को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त करने के लिये उन्होंने इस स्थान पर आकर भगवान शिव की तपस्या की थी। लेकिन इस ऊंचे शिवालय तक पहुंचना इतना आसान भी नहीं है। तुंगनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर चोपता की ओर बढ़ते हुए रास्ते में बांस के वृक्षों का घना जंगल और मनोहारी नजारे देखने को मिलते हैं।

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चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दूरी मात्र तीन किलोमीटर ही रह जाती है। चोपता से तुंगनाथ तक यात्रियों को पैदल ही सफर तय करना होता है। इस दौरान भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिरों के दर्शन भी होते हैं। आपको बता दें कि हर साल नवंबर और मार्च के बीच के समय में यह मंदिर बर्फबारी के कारण बंद रहता है। लकिन जब आम भक्तों के लिए इस मंदिर के कपाट खुलते हैं तो यहां भक्तों का तांता लग जाता है। तुंगनाथ-चोपता-रांसी ट्रैक को बेहतरीन कहा जाता है। चोपता से शुरु होकर इस ट्रैक में कई दिन हरे भरे घास के बुग्यालों, जंगलों से होकर हिमालय की बायोडायवर्सिटी का दीदार होता है। चोपता-तुंगनाथ को मिनी स्विटजरलैंड भी कहा गया है। इस ट्रैक की शुरुआत चोपता से होती है. चोपता के छोटे छोटे मखमली बुग्याल जो चारों और से बांज, बुरांश, देवदार, कैल के पेडों से घिरे हैं। चोपता से पाली बुग्याल होते हुए थौली में पहला पडाव खत्म होता है। थौली से फिर बिसुडी ताल पड़ता है जो बेहद सुन्दर ताल है। बिसुडी ताल से बनतोली होते हुए रांसी पड़ता है। इस ट्रैक को पंचकेदार ट्रैक के नाम से भी जाना जाता है।

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