मां धारी देवी मंदिर जल्द ही भव्य रूप में दिखेगा, मां के नए दरबार की ये तस्वीरें देखिए

मां धारी देवी मंदिर जल्द ही भव्य रूप में दिखेगा, मां के नए दरबार की ये तस्वीरें देखिए

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उत्तराखंड की आराध्य धारी देवी मंदिर का जल्द ही आप नया रूप देख सकेंगे। इस मंदिर को बेहद ही भव्य तरीके से तैयार किया जा रहा है। इस मंदिर का संवारने का जिम्मा कर्नल अजय कोठियाल ने लिया था। ये वो कर्नल हैं, जिन्होंने तय वक्त के भीतर ही केदारनाथ में पुननिर्माण करा दिया था। आज केदारपुरी नए रूप में चमक रही है और देश दुनिया से सभी का ध्यान खींच रही है। लेकिन अब कर्नल कोठियाल को एक बड़ी जिम्मेदारी को पूरा करने जा रहे हैं। मां धारी देवी में पुनर्निर्माण का काम अब लगभग पूरा होने वाला है। ज्यादा से ज्यादा अगले 5 से 6 महीनों के भीतर इस काम के पूरे होने संभावनाएं हैं। IIT से पासआउट के सी कुड़ियाल भी इसमें मदद कर रहे हैं। इस मंदिर को कत्यूरी शैली में सजाया गया है।

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अब आप ये तस्वीर देखिए। मां धारी देवी का मंदिर इसी तरह से तैयार होगा। ये मां धारी देवी के मंदिर का ही नक्शा है।

आपको बता दें कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण की वजह से मां धारी देवी का पुराना मंदिर झील में डूब गया था। इसके बाद जीवीके कंपनी द्वारा झील के बीच में नया मंदिर बनवाया गया था। 1 करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से इस मंदिर को सजाने का काम चल रहा है। बांध की झील के ठीक बीचों-बीच अब नए मंदिर का निर्माण चल रहा है। धारी देवी की कहानी भी अद्भुत है। कहा जाता है कि इस मंदिर में देवी माता दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।

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ये तस्वीर के सी कुड़ियाल ने भी अपने फेसबुक पेज पर डाली है। केसी कुड़ियाल एक बेहतरीन आर्किटेक्ट हैं और IIT से पासआउट हैं।

कहा जाता है कि मां धारी देवी प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। कहते हैं केदारनाथ में आया प्रलय धारी देवी के गुस्से का ही नतीजा था। देवभूमि उत्तराखंड के रक्षक के रूप में धारी देवी को जाना जाता है। पौराणिक धारणा के अनुसार एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मंदिर बह गया था। लेकिन धारी देवी की प्रतिमा एक चट्टान से सटी होने के कारण धारो गांव में बह कर आ गई थी। इस दौरान कुछ अजब घटना हुई थी। इस बारे में भी जानिए।

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कहा जाता है कि उस दौरान गांववालों को धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए। जिसके बाद गांव वालों ने माता के मंदिर की स्थापना वहीं कर दी।

पुजारियों के अनुसार मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है। कालीमठ एवं कालीस्य मठों में माँ काली की प्रतिमा क्रोध मुद्रा में है, परन्तु धारी देवी मंदिर में मां की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है।

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शांत मुद्रा में दिखने वाली धारी माता के गुस्से को दुनिया ने उस वक्त देखा, जब एकाएक देवभूमि पानी में समा गई।

धारी देवी को मां शक्ति के रूप महाकाली के रूप में पूजा जाता है। मान्यता अनुसार मां धारी उत्तराखंड के चारधाम की रक्षा करती है। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है।


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