देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र के शिमलास ग्रांट निवासी भारतीय सेना के जवान आकाश चौहान की मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। 26 वर्षीय आकाश चौहान सेना के आर्मी एजुकेशन सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे थे। बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार शाम सैन्य परिसर के खेल मैदान में फुटबॉल खेलते समय अचानक एक जंगली भैंसा (बायसन) मैदान में घुस आया और उन पर हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण जवान की जान नहीं बचाई जा सकी।
Uttarakhand Soldier Dies in Bison Attack in Pachmarhi
जानकारी के अनुसार, घटना पचमढ़ी स्थित थलसेना के खेल मैदान की है। बृहस्पतिवार शाम जवान मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे। इसी दौरान पास की झाड़ियों से निकलकर एक बायसन अचानक मैदान में आ पहुंचा। जानवर को देखकर वहां अफरा-तफरी मच गई और सैनिकों ने बचने के लिए भागने का प्रयास किया। इसी दौरान बायसन ने आकाश चौहान पर पीछे से हमला कर दिया और अपने नुकीले सींग उनके पेट में घोंप दिए। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी सैनिक तत्काल उन्हें सैन्य अस्पताल ले जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
17 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे आकाश चौहान
मृतक जवान आकाश चौहान उत्तराखंड के देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र स्थित शिमलास ग्रांट के निवासी थे। वह भारतीय सेना की 17 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे और प्रशिक्षण के लिए पचमढ़ी स्थित आर्मी एजुकेशन सेंटर आए हुए थे। स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी गोपाल घासले ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के लिए आए सेना के जवान की बायसन के हमले में मौत हुई है।
जंगल से सटा है सैन्य परिसर, पहले भी आते रहे हैं बायसन
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, पचमढ़ी के सहायक निदेशक संजीव शर्मा के अनुसार, सेना से मिली जानकारी में बताया गया है कि आकाश चौहान आर्मी एजुकेशन सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे थे। सैन्य परिसर जंगल की सीमा से सटा हुआ है। जंगल से बायसन के झुंड कई बार परिसर में पहुंच जाते हैं, लेकिन इस तरह की जानलेवा घटना पहली बार सामने आई है। वन विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
पचमढ़ी में बढ़ रही बायसन की आवाजाही
स्थानीय जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पचमढ़ी के आवासीय और शहरी क्षेत्रों में बायसन के झुंड की आवाजाही बढ़ी हुई थी। घटना से एक दिन पहले शहीद द्वार के पास स्थित छोटी पुलिया पर बायसन का बड़ा झुंड पहुंच गया था। इसके चलते सड़क पर कई घंटों तक वाहनों की आवाजाही बाधित रही।
स्थानीय लोगों ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बायसन के झुंड को सुरक्षित रूप से जंगल में वापस भेजने की मांग की थी। कुछ निवासियों ने वन विभाग पर समस्या को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप भी लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन क्षेत्र के कई हिस्सों में जालियां लगाई गई हैं। उनका दावा है कि रास्ता भटककर रिहायशी इलाकों में पहुंचने वाले जंगली जानवर इन जालियों के कारण वापस जंगल नहीं लौट पाते और आबादी वाले क्षेत्रों में भटकते रहते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
बेहद ताकतवर और फुर्तीला होता है बायसन
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गौर यानी भारतीय बायसन की अच्छी संख्या है। उपलब्ध पूर्व गणना के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में इनकी संख्या 6,600 से अधिक बताई गई है। एक वयस्क गौर का वजन लगभग 400 से 1,200 किलोग्राम तक हो सकता है। भारी शरीर के बावजूद गौर काफी फुर्तीले होते हैं और पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से चढ़ सकते हैं। ये आमतौर पर झुंड में रहते हैं और खतरा महसूस होने या उत्तेजित होने पर आक्रामक हो सकते हैं। पचमढ़ी में सेना के जवान की इस घटना ने वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही और रिहायशी क्षेत्रों के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।