देहरादून: देहरादून के एक निजी स्कूल में छात्रा से छेड़खानी का मामला सामने आने के बाद विवाद लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को यह प्रकरण शहर में चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कई पूर्व छात्र-छात्राओं ने आरोपी शिक्षक के व्यवहार को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कुछ लोगों ने दावा किया कि शिक्षक को पहले भी राजधानी के तीन अन्य स्कूलों से हटाया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच का विषय है।
Dehradun School Case: Teacher Accused of Harassing Student
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ चलाए गए अंतरराष्ट्रीय मी टू आंदोलन जैसी चर्चा देखने को मिल रही है। वर्ष 2018 में भारत में इस आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने साथ हुए उत्पीड़न के अनुभव सार्वजनिक किए थे। अब देहरादून के इस मामले में भी कुछ पूर्व छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से शिक्षक के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं। इन पोस्ट पर दूसरे लोग भी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। चर्चा के बीच स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिकायतों पर संस्थानों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
छात्रा ने शिक्षक पर लगाया गलत तरीके से छूने का आरोप
मामला शुक्रवार को सामने आया, जब राजधानी के एक निजी स्कूल की छात्रा ने शिक्षक पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया। परिजनों का आरोप है कि शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करने के बजाय स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने मामले को दबाने की कोशिश की। परिजनों के मुताबिक, शिकायत करने पहुंची छात्रा और उसकी मां को स्कूल परिसर में कई घंटे तक रोके रखा गया। आरोप है कि इस दौरान स्कूल के गेट बंद कर ताले लगा दिए गए और उन्हें बाहर नहीं जाने दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। मामले में पुलिस ने आरोपी शिक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की जांच जारी है।
पूर्व छात्राओं ने सोशल मीडिया पर साझा किए अनुभव
सोशल मीडिया पर एक छात्रा ने टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वर्ष 2014 में आरोपी शिक्षक को एक अकादमी से हटाया गया था। पोस्ट के मुताबिक, संबंधित छात्रा ने उस समय शिक्षक के गलत व्यवहार की शिकायत प्रबंधन से की थी और इसके बाद शिक्षक को नौकरी से हटा दिया गया था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, वर्ष 2005 में देहरादून के एक स्कूल में पढ़ चुकी युवती ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि आरोपी शिक्षक ने वहां भी तौर पर इस तरह की हरकत की थी। इसके अलावा, जिस स्कूल में हालिया घटना सामने आई है, वहां की एक छात्रा ने प्रबंधन के कुछ वरिष्ठ लोगों की टिप्पणियों और लड़कियों के प्रति व्यवहार पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर सामने आए इन बयानों की सत्यता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है। फिलहाल, पुराने आरोपों और शिक्षक को अन्य संस्थानों से हटाए जाने के दावों को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
पुलिस जांच पर टिकी नजरें
ताजा मामले के साथ सोशल मीडिया पर सामने आए पुराने दावों ने भी जांच को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। पुलिस की जांच में शिकायत, दर्ज प्राथमिकी और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर तथ्यों की पड़ताल अहम होगी। फिलहाल, आरोपी शिक्षक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना इस पूरे मामले के प्रमुख सवाल बने हुए हैं।