उत्तराखंड देहरादूनRekha Arya Case SIT Probes Company Documents

देहरादून: रेखा आर्या को गिरधारी लाल ने चार कंपनियों से हटाया? SIT खंगाल रही दस्तावेज

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की शिकायत पर दर्ज मामले में SIT कंपनियों के दस्तावेजों, फर्जी हस्ताक्षरों और वायरल ऑडियो की जांच कर रही है। पुलिस ने अभियुक्तों को नोटिस भेजे हैं, जबकि बरेली के फार्महाउस की जमीन और संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड भी जांच के दाय

Rekha Arya Case: Rekha Arya Case SIT Probes Company Documents
Image: Rekha Arya Case SIT Probes Company Documents (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की जांच आगे बढ़ रही है। कंपनियों से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू ने रेखा आर्या को चार कंपनियों से बाहर किया है। वहीं, रेखा आर्या ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके पति ने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाया। पुलिस अब कंपनियों के दस्तावेजों, कथित हस्ताक्षरों और मामले से जुड़े वायरल ऑडियो की जांच कर रही है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

Rekha Arya Case: SIT Probes Company Documents

रेखा आर्या की शिकायत पर कैंट थाने में दर्ज प्राथमिकी की जांच के लिए गठित SIT मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच में गिरधारी लाल साहू की ओर से रेखा आर्या को चार कंपनियों से बाहर किए जाने की जानकारी सामने आई है। रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि उन्हें निदेशक पद से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनियों में निदेशक पद से हटाने की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई और संबंधित दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं।

बरेली के फार्महाउस की जमीन भी जांच के दायरे में

इस मामले में बरेली-सीतापुर राजमार्ग पर लालपुल गांव में बन रहे फार्महाउस की जमीन से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिस कंपनी के नाम पर यह जमीन दर्ज थी, उसमें रेखा आर्या और सतेंद्र राठौर निदेशक थे। बरेली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जमीन मेसर्स कृष्णा-वैष्णवी एंटरप्राइजेज के नाम पर पंजीकृत थी। इसके अलावा बनखंडी रुद्राक्षधाम इन्फ्राडेवलपर प्राइवेट लिमिटेड और श्री अंबे ऑटो डीलर प्राइवेट लिमिटेड में भी रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू की हिस्सेदारी होने की बात सामने आई है। SIT इन कंपनियों से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है, ताकि निदेशक पद, हिस्सेदारी और दस्तावेजों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

हल्द्वानी और बरेली से जुटाए गए दस्तावेज

जांच के दौरान SIT की टीमें हल्द्वानी और बरेली पहुंची थीं। यहां से कंपनियों से संबंधित कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए हैं। अब इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच टीम के सामने प्रमुख सवाल यह है कि रेखा आर्या को निदेशक पद से हटाने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और उन पर मौजूद हस्ताक्षर वास्तविक हैं या नहीं। इसके लिए हस्ताक्षरों की सत्यता की जांच से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। दस्तावेजों की जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

अभियुक्तों से संपर्क नहीं, पुलिस ने भेजे नोटिस

मामले की जांच में SIT के सामने अभियुक्तों से संपर्क स्थापित करना भी चुनौती बना हुआ है। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के अनुसार, अभियुक्तों से संपर्क करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। पुलिस ने अभियुक्तों को नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने और जांच में सहयोग करने को कहा है। संबंधित ठिकानों पर अभियुक्तों के नहीं मिलने के कारण उनके परिजनों को नोटिस तामील कराए गए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले में साक्ष्य जुटाने और उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि करने की कार्रवाई जारी है।

वायरल ऑडियो में कल्पना मिश्रा का नाम, भूमिका की जांच

रेखा आर्या प्रकरण से जुड़े कथित वायरल ऑडियो की भी SIT जांच कर रही है। ऑडियो में कल्पना मिश्रा का नाम सामने आने के बाद उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। जांच टीम ऑडियो से जुड़े तथ्यों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें सामने आए तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

अब दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच पर टिकी नजर

रेखा आर्या से जुड़े इस मामले में SIT की जांच के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। इनमें कंपनियों के रिकॉर्ड, निदेशक पद से हटाने की प्रक्रिया, कथित हस्ताक्षरों की सत्यता, अभियुक्तों के बयान और वायरल ऑडियो की जांच शामिल हैं। अब जांच में जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच के परिणामों के बाद ही सामने आएगा।