देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के समर वैली स्कूल में छात्रा से कथित छेड़छाड़ और बैड टच के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, जिला प्रशासन की ओर से गठित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की पहल के बाद छात्रा ने पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटी है। स्कूल प्रबंधन ने आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया है।
Dehradun School Harassment Case: Teacher Suspended After Student Complaint
देहरादून के निजी स्कूल में छात्रा से कथित छेड़छाड़ के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को एनएसयूआई से जुड़े छात्र स्कूल के बाहर एकत्र हुए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में देरी की गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की पहल के बाद पुलिस को दी तहरीर
जिला प्रशासन की ओर से गठित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने मामले की जानकारी मिलने के बाद छात्रा और उसके परिजनों से संपर्क किया। प्रशासन के मुताबिक, सामाजिक परिस्थितियों और मर्यादा को लेकर परिवार शुरुआत में सामने आने से हिचक रहा था। कमेटी की ओर से समझाए जाने के बाद छात्रा ने पुलिस को तहरीर दी। अब पुलिस तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया कर रही है। देहरादून के सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा स्कूल की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपी शिक्षक को किया निलंबित
मामले के सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने संबंधित शिक्षक को निलंबित कर दिया है। हालांकि, छात्र संघ से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी के अनुसार, यदि छात्र संघ की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया जाता है, तो मामले की जांच कराकर शिक्षा विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और किसी को भी अपनी जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जाना चाहिए। आगे पढ़िए..
ये भी पढ़ें:
आरोपी शिक्षक ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष
आरोपों के बीच संबंधित शिक्षक ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अध्यापन के 25 साल के करियर में पहली बार उन पर इस तरह के आरोप लगे हैं। शिक्षक ने दावा किया कि वह सभी बच्चों के साथ अपने बेटे-बेटियों जैसा व्यवहार करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे को लगता है कि उनसे कोई गलती हुई है, तो वह उसके लिए क्षमा मांगते हैं। शिक्षक का यह बयान उनके पक्ष के रूप में सामने आया है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाली शिकायत का दावा
पीड़ित परिवार के अनुसार, 23 अक्टूबर को छात्रा और उसकी मां स्कूल पहुंचीं और प्रबंधन को शिक्षक के खिलाफ शिकायत दी। परिवार का दावा है कि शिकायत पर 15 छात्राओं के हस्ताक्षर थे। परिवार ने आरोप लगाया कि 15 अक्टूबर को भी शिक्षक के खिलाफ शिकायत की गई थी। उस समय स्कूल प्रबंधन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में छात्रा पर दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया। परिवार का यह भी आरोप है कि स्कूल के डायरेक्टर ने शिक्षक के पक्ष में अपनी बात रखी। परिजनों ने शिक्षक को बर्खास्त करने और डायरेक्टर से असेंबली में सभी बच्चों के सामने सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। इन आरोपों और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त
सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी ने कहा कि विद्यालय बच्चों के लिए परिवार के बाद दूसरा महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसलिए स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को शिक्षा देने के साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करे। फिलहाल, पुलिस मामले में तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में है। शिक्षक को निलंबित किया जा चुका है और प्रशासन पूरे प्रकरण की जांच कर रहा है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों पर स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।