देहरादून: उत्तराखंड में NEET UG स्टेट कोटे की MBBS सीटों पर दाखिले को लेकर प्रमाणपत्रों की जांच का दायरा बढ़ गया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल को करीब 370 अभ्यर्थियों की सूची सौंपकर उनके स्थायी निवास समेत अन्य प्रमाणपत्रों की जांच की मांग की है। मंत्री ने जिलाधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
Uttarakhand NEET UG: Documents of 370 MBBS Candidates Under Scrutiny
यह मामला स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत MBBS दाखिलों में सामने आई अनियमितताओं के बाद चर्चा में आया। अधिकारियों के अनुसार, पांच अभ्यर्थियों से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर मिले दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। संबंधित प्रमाणपत्र भी निरस्त किए गए। इसके बाद अब अन्य अभ्यर्थियों के स्थायी निवास और दूसरी श्रेणियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की मांग उठी है। हालांकि, सूची में शामिल सभी 370 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी हैं, ऐसा अभी साबित नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता ने भी व्यापक सत्यापन की मांग की है, न कि सभी अभ्यर्थियों को दोषी बताया है।
एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर दावे
बहुगुणा के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा के वंशज होने का दावा करते हुए प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे। उनके दस्तावेजों में अलग-अलग पते दर्ज होने पर सवाल उठे। इस मामले में दस्तावेजों और संबंधित पते का सत्यापन कराया गया, जिसके बाद प्रमाणपत्रों को फर्जी पाए जाने की बात सामने आई।
दूसरे राज्यों से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों पर भी उठे सवाल
बहुगुणा ने दावा किया है कि सूची में कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जिन्होंने 10वीं-12वीं की पढ़ाई या NEET परीक्षा उत्तराखंड से बाहर की है, लेकिन MBBS दाखिले के लिए उत्तराखंड का स्थायी निवास अथवा विशेष श्रेणी से जुड़े प्रमाणपत्र इस्तेमाल किए। हालांकि, दूसरे राज्य में पढ़ाई करना या वहां से NEET देना अपने आप में फर्जी प्रमाणपत्र का प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है।
अब जिलावार होगा दस्तावेजों का सत्यापन
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार, आगे NEET काउंसलिंग के तहत दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को संबंधित जारीकर्ता प्राधिकरणों से सत्यापित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले और दूसरे चरण में हुए दाखिलों के दस्तावेजों का भी जिलावार सत्यापन कराया जाना है। मामले में प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सूची में शामिल कितने अभ्यर्थियों के दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं और कितने मामलों में वास्तविक अनियमितता पाई जाती है।