नैनीताल: जनपद नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। महिला से छेड़छाड़ के आरोपित चार पर्यटकों से कथित तौर पर 18 हजार रुपये लेकर मामला रफादफा करने का आरोप पुलिस पर लगा है। मामला सामने आने और ऑनलाइन लेनदेन की पुष्टि के बाद नैनीताल एसएसपी ने ज्योलीकोट चौकी इंचार्ज और एक कांस्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया है।
Nainital Police Face Action Over 18000 Rupee Tourist Case
जानकारी के अनुसार, ज्योलीकोट क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने चौकी पुलिस को सूचना दी थी कि स्कॉर्पियो सवार चार पर्यटकों ने क्षेत्र में एक महिला के साथ छेड़छाड़ की है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने वायरलेस के माध्यम से आसपास के पुलिसकर्मियों को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने पर्यटकों के वाहन को रानीबाग के पास पकड़ लिया और चारों पर्यटकों को ज्योलीकोट चौकी लाया गया।
18 हजार रुपये लेकर मामला रफादफा करने का आरोप
आरोप है कि चौकी लाए जाने के बाद पुलिस ने पर्यटकों से 18 हजार रुपये लिए और बिना कार्रवाई किए उन्हें छोड़ दिया। जब मामले में आरोपित पर्यटकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते दबाव के बाद पर्यटकों को कथित तौर पर लिए गए 18 हजार रुपये ऑनलाइन वापस कर दिए गए। हालांकि, रकम वापस किए जाने के बावजूद स्थानीय लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया।
एसएसपी तक पहुंचा मामला, दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
मामला इंटरनेट मीडिया पर सामने आने के बाद नैनीताल एसएसपी मंजूनाथ टीसी के संज्ञान में आया। इसके बाद उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए ज्योलीकोट चौकी इंचार्ज श्याम बोरा और कांस्टेबल धर्मेंद्र साहनी को लाइन हाजिर कर दिया। एसएसपी के अनुसार, महिला से छेड़छाड़ के आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय रुपयों के लेनदेन की शिकायत मिली थी। ऑनलाइन भुगतान से संबंधित शिकायत की पुष्टि होने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला से छेड़छाड़ जैसे आरोपों में कानूनी कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर पैसों का लेनदेन होने की शिकायत ने पुलिस विभाग को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। फिलहाल दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मामले में आगे की विभागीय जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित रूप से पैसे क्यों लिए गए और पूरे घटनाक्रम में अन्य किसी पुलिसकर्मी की भूमिका थी या नहीं।