रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान खुद को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का कथित रूप से लाभ लेने वाले दो आरोपितों को अदालत ने दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोनों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोनों को एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
Fake Judge Sentenced to Two Years in Char Dham Case
यह मामला वर्ष 2024 का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद आई-10 कार में सवार कुछ लोग स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर क्षेत्र में घूम रहे हैं और सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। सूचना मिलने पर गुप्तकाशी थाना पुलिस ने वाहन को रोककर जांच की।
खुद को बताया था सिविल जज
पुलिस पूछताछ के दौरान चालक ने अपना नाम अविनाश मोहन गुप्ता बताते हुए खुद को लखनऊ का सिविल जज बताया। वहीं कार में मौजूद महिला ने अपना नाम ज्योति दुबे बताया। जब पुलिस ने दोनों से न्यायिक पहचान पत्र मांगा तो वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। आगे पढ़िए..
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कार पर मिला यूपी शासन का बोर्ड, हूटर और तिरंगा
जांच के दौरान पुलिस को कार पर 'उत्तर प्रदेश शासन' अंकित मिला। वाहन में हूटर, फ्लैश लाइट और तिरंगा झंडा भी लगा हुआ था। इसके अलावा पुलिस ने वाहन से 17 मोबाइल फोन भी बरामद किए। जांच में सामने आया कि आरोपित कथित रूप से फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे। मामले में गुप्तकाशी थाने में मुकदमा दर्ज कर विवेचना पूरी की गई और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सहायक अभियोजन अधिकारी प्रमोद चंद्र आर्य ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए।
अदालत ने सुनाई दो-दो साल की सजा
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार की अदालत ने दोनों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि निर्धारित जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो दोनों दोषियों को एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।