पौड़ी गढ़वाल: गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्र में एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। समय पर आवश्यक चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल पाने के कारण पहले गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद मृत शिशु का प्रसव कराया गया, लेकिन महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। यह घटना एक बार फिर दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
Pregnant Woman Dies Amid Healthcare Crisis in Pauri Garhwal
जानकारी के अनुसार पौड़ी गढ़वाल जिले के ग्राम कलखोबिया (किनगोड़ीखाल) निवासी विनीता उर्फ अनीता का विवाह करीब डेढ़ वर्ष पहले बडेरी-नलाई गांव निवासी कुलदीप सिंह से हुआ था। वह आठ माह की गर्भवती थीं और उनका उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नैनीडांडा में चल रहा था। कुछ दिन पहले अचानक तेज पेट दर्द और लगातार उल्टियां होने पर चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। लेकिन पूरे विकासखंड में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को उन्हें गढ़वाल से 110 किलोमीटर दूर काशीपुर ले जाना पड़ा।
जांच में सामने आई दुखद सच्चाई
काशीपुर में अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान पता चला कि गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हो चुकी है। इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन के माध्यम से मृत शिशु का प्रसव कराया। आगे पढ़िए..
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हालांकि प्रसव के बाद भी महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई, जिसके चलते उन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया। वहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
एक माह पहले तक सब कुछ सामान्य था
परिजनों के अनुसार, लगभग एक महीने पहले रामनगर में कराई गई जांच में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ बताए गए थे। इसके बाद वह कुछ समय अपने मायके में रहीं और हाल ही में ससुराल लौटी थीं। घटना के बाद परिवार में गहरा शोक व्याप्त है।
सड़क सुविधा भी बनी परेशानी
परिजनों ने बताया कि बडेरी-नलाई गांव तक आज भी मोटर मार्ग नहीं पहुंचा है। गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए करीब एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गंभीर हालत में विनीता को परिजन किसी तरह पैदल सड़क तक लाए, जिसके बाद उन्हें वाहन से काशीपुर ले जाया गया।
ग्रामीणों ने उठाए स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नैनीडांडा विकासखंड के किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। साथ ही नलाई मल्ली-अदालीखाल मार्ग लंबे समय से जर्जर स्थिति में है और उसका डामरीकरण वर्षों से नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने सड़क को बडेरी-नलाई गांव तक विस्तारित करने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग दोहराई है।