देहरादून: देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित सारथी विहार में लंबे समय से सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई थी। जल संस्थान की जांच में पता चला कि गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान मुख्य सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे सीवर व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मामले में जल संस्थान ने संबंधित कंपनी को 23.48 लाख रुपये का नोटिस जारी कर जल्द समाधान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
Major revelation regarding sewer overflow in Dehradun
उत्तराखंड जल संस्थान के अनुसार, हरिद्वार रोड स्थित सारथी विहार क्षेत्र में बार-बार सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें मिल रही थीं। समस्या की तकनीकी जांच और सीवर नेटवर्क की वीडियोग्राफी कराए जाने पर पता चला कि गैस पाइपलाइन सीवर लाइन और मैनहोल के बीच से गुजारी गई है। जांच में यह भी सामने आया कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान सीवर नेटवर्क को क्षति पहुंची, जिसके कारण सीवर का प्रवाह बाधित हो गया और गंदा पानी लगातार सड़कों पर बहने लगा।
वर्ष 2022 से बनी हुई है समस्या
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सतीश चंद्र नौटियाल द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, सरस्वती विहार क्षेत्र में वर्ष 2022 के दौरान गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया गया था। तभी से मुख्य सीवर लाइन प्रभावित है और क्षेत्र में सीवर जाम तथा ओवरफ्लो की समस्या लगातार बनी हुई है। स्थानीय निवासी लंबे समय से दुर्गंध, जलभराव और गंदगी की समस्या झेल रहे हैं।
विभाग के अनुसार समस्या को दूर करने के लिए समय-समय पर जेटिंग मशीन, सक्शन मशीन और श्रमिकों की मदद से सफाई अभियान चलाया गया। हालांकि तकनीकी बाधा बरकरार रहने के कारण समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हर बार सीवर की सफाई के बाद कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन ओवरफ्लो की समस्या दोबारा सामने आती रही।
50 मीटर सीवर मरम्मत का दावा भी सवालों के घेरे में
जल संस्थान ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि संबंधित कंपनी की ओर से लगभग 50 मीटर सीवर लाइन के पुनर्निर्माण और मरम्मत का दावा किया गया था। लेकिन विभागीय निरीक्षण, तकनीकी रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियोग्राफी के विश्लेषण में यह दावा सही नहीं पाया गया। जांच में अपेक्षित मरम्मत कार्य के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। आगे पढ़िए..
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हरिद्वार रोड पर भी मिली अनियमितताएं
जल संस्थान की जांच केवल सरस्वती विहार तक सीमित नहीं रही। हरिद्वार रोड पर अजित टावर के सामने भी सीवर उफान की गंभीर समस्या की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार यहां भी गैस पाइपलाइन सीवर नेटवर्क के बेहद निकट या उसके भीतर से गुजरती हुई पाई गई। इससे सीवर का सामान्य प्रवाह बाधित हो रहा है और बार-बार ओवरफ्लो की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
कई बार भेजे गए नोटिस, फिर भी नहीं हुआ समाधान
जल संस्थान के रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित कंपनी को 22 दिसंबर 2025, 10 फरवरी 2026 सहित कई अवसरों पर पत्र भेजकर समस्या की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद स्थिति में कोई प्रभावी सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब विभाग ने जिम्मेदारी तय करने और आर्थिक नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एनओसी के बिना नहीं होगी खोदाई
जल संस्थान ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की सड़क खोदाई, पाइपलाइन बिछाने या निर्माण कार्य से पहले विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त सीवर नेटवर्क की मरम्मत, हुए नुकसान की भरपाई और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।
जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
जल संस्थान ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो सड़कों पर बह रहे सीवर के कारण जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विभाग का कहना है कि क्षेत्र में फैल रही दुर्गंध, गंदगी और जलभराव न केवल स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण है बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है।