उत्तराखंड उत्तरकाशीRare Himalayan Weasel Captured on Camera in Gangotri National Park

Uttarakhand news: उत्तराखंड में मिला वो दुर्लभ जीव, जिसे ढूंढ रहे हैं दुनियाभर के वैज्ञानिक; कैमरे में कैद हुई तस्वीरें

उत्तराखंड के गंगोत्री नेशनल पार्क में पहली बार दुर्लभ हिमालयन वीजल की तस्वीरें कैमरा ट्रैप में कैद हुई हैं। यह खोज राज्य की समृद्ध जैव विविधता और वन अनुसंधान के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

Rare Himalayan weasel: Rare Himalayan Weasel Captured on Camera in Gangotri National Park
Image: Rare Himalayan Weasel Captured on Camera in Gangotri National Park (Source: Social Media)

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के Gangotri National Park से एक बड़ी और रोमांचक खबर सामने आई है। यहां पहली बार दुर्लभ Himalayan weasel की तस्वीरें कैमरा ट्रैप में कैद की गई हैं।

Rare Himalayan Weasel Captured on Camera in Gangotri National Park

वन अनुसंधान रेंज द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में इस दुर्लभ जीव की सजीव गतिविधियां रिकॉर्ड की गई हैं। 7 मार्च को लगाए गए कैमरों की जांच के दौरान 29 मार्च को यह अहम तस्वीरें सामने आईं, जो वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही हैं।

लंबे समय से चल रहा था अध्ययन

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हिमालयन वीजल की मौजूदगी के संकेत पहले से गंगोत्री, माणा और बदरीनाथ क्षेत्र में मिल रहे थे। इसके व्यवहार और उपस्थिति पर लंबे समय से अध्ययन किया जा रहा था, लेकिन पहली बार इसे कैमरे में कैद किया गया है। आगे पढ़िए..

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कैसा होता है हिमालयन वीजल?

हिमालयन वीजल एक छोटा मांसाहारी स्तनधारी जीव है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Mustela sibirica कहा जाता है। यह बेहद चपल, गुप्त और दुर्लभ स्वभाव का होता है, जिससे इसे देख पाना बेहद मुश्किल होता है। यह जीव छोटे-छोटे शिकारों की संख्या को नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आमतौर पर यह 2500 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है, लेकिन इस बार इसकी रिकॉर्डिंग और भी ऊंचाई वाले क्षेत्र में हुई है।

वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि

वन अधिकारियों का कहना है कि यह खोज गंगोत्री नेशनल पार्क की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है। यह न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि संरक्षण प्रयासों को भी मजबूती देती है।
हिमालयन वीजल की यह पहली तस्वीरें न केवल एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्र जैव विविधता के खजाने से भरे हुए हैं।