देहरादून: उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। Uttarakhand Power Corporation Limited की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कई इलाकों में 5% तक मीटर रीडिंग समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे बिलिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
Power Meter Reading Issues Rising in Uttarakhand
रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हरिद्वार जोन है। Roorkee सर्किल में 6% से अधिक मीटर की रीडिंग नहीं हो पाई है, जबकि Haridwar सर्किल में यह आंकड़ा 5% से ऊपर है। इसके अलावा गढ़वाल जोन के Srinagar, Kotdwar और Rudraprayag में भी 4% से 5% तक मीटर रीडिंग नहीं हो सकी है। वहीं कुमाऊं और रुद्रपुर जोन की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है, जहां अधिकांश सर्किलों में यह आंकड़ा एक प्रतिशत से नीचे है।
उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला असर
मीटर रीडिंग समय पर न होने की स्थिति में बिजली विभाग औसत खपत के आधार पर बिल जारी करता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को वास्तविक उपयोग से अधिक या कम बिल मिलने की संभावना रहती है। इससे अक्सर बिलिंग को लेकर विवाद बढ़ जाते हैं और लोगों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आगे पढ़िए..
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क्या है NMR (Not Meter Reading)
NMR का मतलब है ‘नॉट मीटर रीडिंग’, यानी वह स्थिति जब निर्धारित समय पर मीटर की रीडिंग नहीं ली जा सके। इस स्थिति में विभाग अनुमान के आधार पर बिल बनाता है, जिससे कई बार गलत बिलिंग की शिकायतें सामने आती हैं।
समस्या के प्रमुख कारण
मीटर रीडिंग न हो पाने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें मीटर तक पहुंच में दिक्कत, स्टाफ की कमी, तकनीकी खामियां और दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचने में आने वाली मुश्किलें प्रमुख हैं। पहाड़ी इलाकों में यह समस्या और अधिक जटिल हो जाती है। इस स्थिति से न केवल उपभोक्ता परेशान हैं, बल्कि विभाग को भी राजस्व नुकसान का खतरा है। ऐसे में Uttarakhand Power Corporation Limited के सामने मीटर रीडिंग व्यवस्था को सुधारना एक बड़ी चुनौती बन गई है।