देहरादून: उत्तराखंड शासन ने बुधवार देर शाम बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए आईएएस, पीसीएस और सचिवालय सेवा के कुल 12 अधिकारियों के पदभार में बदलाव किया है।
12 IAS, PCS, and secretariat officers transferred
जारी आदेश के अनुसार जिलाधिकारी से लेकर अपर सचिव और निगमों के प्रबंध निदेशक स्तर तक अहम जिम्मेदारियां बदली गई हैं। संयुक्त सचिव कार्मिक राजेंद्र सिंह पतियाल की ओर से जारी आदेश में तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
IAS अधिकारियों के तबादले
आईएएस विशाल मिश्रा को रुद्रप्रयाग का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी संभाल रहे आईएएस प्रतीक जैन को अब गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) का प्रबंध निदेशक और मिशन निदेशक, जल-जीवन मिशन बनाया गया है।
आईएएस संजय कुमार से निदेशक सेवायोजन की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। हालांकि उनके अन्य पदभार यथावत रहेंगे।
आईएएस सौरभ गहरवार को अपर सचिव उद्योग और निदेशक, राजकीय मुद्रणालय रुड़की का दायित्व सौंपा गया है।
आईएएस नरेंद्र सिंह भंडारी को अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पर्यटन विकास परिषद और निदेशक सेवायोजन के पद पर तैनात किया गया है।
आईएएस विनोद गिरी गोस्वामी को अपर सचिव, आवास विभाग और मुख्य कार्यपालक अधिकारी, भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण नियुक्त किया गया है।
पीसीएस अधिकारियों के पदभार में बदलाव
पीसीएस गिरधारी सिंह रावत को अपर सचिव अल्पसंख्यक कल्याण, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण और निदेशक उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद का दायित्व सौंपा गया है।
पीसीएस अब्ज प्रसाद वाजपेयी को सिटी मजिस्ट्रेट, हल्द्वानी बनाया गया है, जबकि पीसीएस त्रिलोक सिंह मार्तोलिया को प्रधान प्रबंधक, शुगर मिल किच्छा का अतिरिक्त पदभार दिया गया है।
सचिवालय सेवा में भी फेरबदल
सचिवालय सेवा के सुरेश जोशी को अपर सचिव, जनगणना नियुक्त किया गया है। वहीं इसी संवर्ग के कवींद्र सिंह को अपर सचिव, क्रियान्वयन विभाग बनाया गया है।
कमलेश मेहता की प्रतिनियुक्ति समाप्त
राज्य निर्वाचन आयोग में तैनात पीसीएस अधिकारी कमलेश मेहता की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें डिप्टी कलेक्टर, टिहरी गढ़वाल के पद पर तैनात किया गया है।
तत्काल प्रभाव से लागू होंगे आदेश
शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से अपने-अपने नए पदों का कार्यभार ग्रहण करें। इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और विभागीय कार्यों में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।