उत्तराखंड देहरादूनNational Crime Records Bureau report on Uttarakhand

उत्तराखंड: हर दिन 3 बच्चे हो रहे गायब, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने खोली पुलिस दावों की पोल

एनसीआरबी की इस रिपोर्ट में उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे हिमालयी राज्यों में भी लापता बच्चों के आकड़ों में वृद्धि देखी गई है। इन सब में उत्तराखंड की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक..

NCRB report: National Crime Records Bureau report on Uttarakhand
Image: National Crime Records Bureau report on Uttarakhand (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड में मासूम बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। NCRB की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में राज्य से 18 वर्ष से कम उम्र के कुल 1,209 बच्चे लापता हुए। यानी हर दिन औसतन तीन बच्चे अपने घरों से गायब हुए। इनमें से केवल 276 बच्चे ही मिल पाए, जबकि 933 बच्चे अब तक लापता हैं।

National Crime Records Bureau report on Uttarakhand

उत्तराखंड पुलिस हर साल “ऑपरेशन स्माइल” के नाम से एक विशेष अभियान चलाती है, जिसका उद्देश्य लापता बच्चों को ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाना होता है। इस अभियान के दौरान पुलिस कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस और फोटो सेशन के ज़रिए सफलता के दावे करती है। लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)की रिपोर्ट ने इन दावों की सच्चाई उजागर कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023-24 में उत्तराखंड से 18 वर्ष से कम उम्र के 408 लड़के और 802 लड़कियां लापता हुईं, जिनमें से पुलिस केवल 128 लड़के और 148 लड़कियों को ही ढूंढ पाई। ये आंकड़े दिखाते हैं कि बच्चों को खोज पाने में पुलिस की सफलता दर करीब 23 प्रतिशत ही रही है।

उत्तराखंड की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक

एनसीआरबी की इस रिपोर्ट में उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे हिमालयी राज्यों में भी लापता बच्चों के आकड़ों में वृद्धि देखी गई है। इन सब राज्यों में से उत्तराखंड की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां 1209 में से केवल 276 बच्चे ही बरामद हो पाए। नसीआरबी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्तराखंड में साल 2023-24 के दौरान अलग-अलग उम्र के कुल 6,532 लोग लापता हुए हैं। जिनमें 3,277 पुरुष और 3,255 महिलाएं शामिल हैं। इनमें से पुलिस केवल 1,688 पुरुष और 1,013 महिलाओं को ही ढूंढ पाई है। ये आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में बच्चों के साथ वयस्कों के लापता होने के मामलों में भी स्थिति बेहद गंभीर है।

केवल ऑपरेशन चलाने से नहीं होगा समाधान

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के लापता होने के पीछे गरीबी, मानव तस्करी, घर से भागना, ऑनलाइन अपराध, और अवैध बाल श्रम आदि कई कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आकड़ों को सुधारने के लिए केवल ऑपरेशन चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को एक स्थायी और प्रभावी तंत्र विकसित करना होगा, जिसमें स्थानीय समुदाय, स्कूल और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी हो।