उत्तराखंड देहरादूनNARI 2025 reports Dehradun in last 10 on Women Safety

Uttarakhand News: देहरादून महिला सुरक्षा सूचकांक में पिछड़ा, NARI 2025 रिपोर्ट से मचा सियासी घमासान

राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा जारी NARI 2025 में देशभर के 31 शहरों में 12,770 महिलाओं पर सर्वे किया गया। इसमें महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को शामिल किया गया है..

NARI 2025 report: NARI 2025 reports Dehradun in last 10 on Women Safety
Image: NARI 2025 reports Dehradun in last 10 on Women Safety (Source: Social Media)

देहरादून: राष्ट्रीय वार्षिक महिला सुरक्षा रिपोर्ट एवं सूचकांक (NARI 2025) ने देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 10 सबसे असुरक्षित शहरों में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून भी शामिल है।

NARI 2025 reports Dehradun in last 10 on Women Safety

रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही उत्तराखंड में सियासी हलचल मच गई है। एक ओर जहां राज्य महिला आयोग ने इस सर्वे को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया है, वहीं कांग्रेस इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार पर हमला बोल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर 64.6% है जबकि देहरादून का सुरक्षा स्कोर 60.6% (राष्ट्रीय औसत से कम) है। देहरादून का 31 शहरों में 24वां स्थान है, और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थानों में टॉप शहर कोहिमा (82.29%) बताया गया है।

नारी 2025 क्या है?

NARI (National Annual Report & Index on Women’s Safety) राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा महिलाओं की सुरक्षा का एक मूल्यांकन है, जो महिलाओं पर उत्पीड़न की व्यापकता और रिपोर्टिंग व्यवहार जैसे मानकों पर एक वार्षिक रिपोर्ट है। NARI 2025 में, भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर लगभग 60% दर्ज किया गया, जिसमें 10 में से 4 महिलाओं ने कहा कि वे असुरक्षित महसूस करती हैं - ये एक पुलिस रिकॉर्ड है.. पुलिस रिकॉर्ड ही समस्या को कम करके आंकते हैं क्योंकि लगभग 3 में से केवल 1 महिला ही घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराती है, जिससे आधिकारिक आँकड़े धुंधले पड़ जाते हैं.. आंकड़े इससे कहीं ज्यादा भयानक हो जाते हैं। कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, मुंबई सात सबसे सुरक्षित शहरों में शामिल हैं, जबकि देहरादून 31 शहरों के मैट्रिक्स में महिलाओं के लिए 10 सबसे कम सुरक्षित शहरों में से एक है।

डराती है रिपोर्ट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में 21% महिलाएं शारीरिक उत्पीड़न की शिकार हुईं। 10% महिलाएं मानसिक उत्पीड़न का शिकार बताई गईं। 19% महिलाओं को पड़ोसियों से, जबकि 13% महिलाओं को कार्यस्थल पर उत्पीड़न झेलना पड़ा। वहीं 40% महिलाओं ने शिकायत करने के बजाय प्रभावित क्षेत्र में जाना बंद कर दिया, केवल 4% महिलाओं ने पुलिस से मदद ली। दिन के समय 70% महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन रात में यह आंकड़ा घटकर 44% रह जाता है।

बीजेपी नेताओं के किया खारिज

उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष से मेरी बात हुई है। उन्होंने साफ किया है कि इस तरह का कोई सर्वे नहीं किया गया। उत्तराखंड और देहरादून में महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। राज्य सरकार महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर लगातार काम कर रही है।” वहीं, बीजेपी विधायक आशा नौटियाल ने भी कहा कि “प्रदेश में महिला अपराध में संलिप्त अपराधियों को कड़ी सजा दी जा रही है और धामी सरकार महिला सुरक्षा को लेकर कई फैसले ले चुकी है।”

केंद्र की रिपोर्ट नकार रही भाजपा

कांग्रेस पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा, कि “बीजेपी के नेता ही महिला उत्पीड़न की घटनाओं में लिप्त पाए जा रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार रिपोर्ट को ही नकार रही है, जबकि राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाइट पर इस सर्वे और कार्यक्रम का जिक्र मौजूद है।”