ऋषिकेश: फूड पार्क घोटाले के बहुचर्चित मामले में सीबीसीआईडी (CBCID) ने बड़ा कदम उठाते हुए करनवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी करनवीर, मेरठ के पूर्व विधायक चौधरी चंद्रवीर सिंह का भाई है। गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही ऋषिकेश कोर्ट में करनवीर सहित तीन आरोपियों को सात साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
Karanveer Singh arrested in food park scam
दरअसल, यह पूरा प्रकरण हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में प्रस्तावित फूड पार्क परियोजना से जुड़ा है। निवेश और विकास के नाम पर तैयार की गई इस परियोजना में करोड़ों रुपये का हेरफेर और फर्जीवाड़ा सामने आया था। जांच में स्पष्ट हुआ कि करनवीर सिंह, आशीष पाराशर और अजय कुमार राणा ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी की योजना बनाई। CBCID ने इस मामले में कई महीनों तक गहन जांच की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
फरार घोषित कर कोर्ट ने जारी किया वारंट
बीते शनिवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऋषिकेश ने तीनों आरोपियों को सात-सात साल की कैद और आर्थिक दंड की सजा सुनाई। हालांकि, सजा के ऐलान के दौरान करनवीर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। उन्हें फरार घोषित करते हुए कोर्ट ने वारंट जारी किया था। उसके बाद बीते रविवार को निरीक्षक साहिस्ता परवीन की अगुवाई में सीबीसीआईडी टीम मेरठ पहुंची और छापेमारी कर करनवीर को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच देहरादून लाकर जेल भेज दिया गया।
परियोजना शुरू होने से पहले ही फर्जीवाड़ा
फूड पार्क परियोजना उत्तराखंड में कृषि और उद्योग के विकास के लिए शुरू की गई थी। इससे किसानों को सीधा लाभ मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की उम्मीद थी। लेकिन परियोजना शुरू होने से पहले ही फर्जीवाड़े और घोटाले के उजागर होने से सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। करनवीर सिंह का नाम मामले में सामने आने से राजनीतिक हलकों में भी हलचल रही, क्योंकि वे पूर्व विधायक के भाई हैं और स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव माना जाता है। आरोपी करनवीर सिंह को जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। माना जा रहा है कि इस केस के बहाने राज्य सरकार बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर सख्ती अपना सकती है।