उत्तराखंड देहरादूनEducation department prepared new transfer rules

उत्तराखंड: जिन्होंने मैदानी स्कूलों का रिजल्ट किया चौपट, उन्हें पहाड़ी बच्चों को पढ़ाने भेजेगा शिक्षा विभाग

शिक्षा विभाग के अनेक गजब के फरमानों में से एक नया फरमान तैयार है.. पिछले दो सालों से जिन शिक्षकों ने मैदानी इलाकों में बच्चों का भविष्य खराब किया है उन्हें पहाड़ के बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग की नई नियमावली तो यही कहती है।

transfer rules for teachers: Education department prepared new transfer rules
Image: Education department prepared new transfer rules (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड के दूरदर्शी शिक्षा मंत्री की पहाड़ के नौनिहालों के लिए एक नई सौगात है। पहाड़ के विद्यालय शिक्षा का केंद्र ना होकर मात्र शिक्षकों के लिए सजा देने का केंद्र बन चुके हैं। शिक्षा विभाग की नई नियमावली के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में जिन शिक्षकों ने पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा रिजल्ट चौपट किया है, उन्हें पहाड़ के बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा जाएगा।

Uttarakhand Education Department prepared new transfer rules

शिक्षा विभाग के अनेक गजब के फरमानों में से एक नया फरमान तैयार है.. पिछले दो सालों से जिन शिक्षकों ने मैदानी इलाकों में बच्चों का सबसे अधिक भविष्य खराब किया है, उन्हें पहाड़ के स्कूलों में बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग की नई नियमावली तो यही कहती है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के तबादलों के लिए नई नियमावली तैयार की है, जिसे जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट में पेश किया जाएगा। इस नियमावली में सुगम और दुर्गम के स्थान पर प्रदेश को पर्वतीय और मैदानी दो भागों में बांटा गया है।

शिक्षा विभाग की नई नियमावली

उत्तराखंड में सभी विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों के लिए 2017 में तबादला एक्ट लागू किया गया था। इस एक्ट के लागू होने के बाद से इसी एक्ट के तहत कर्मचारियों और शिक्षकों के तबादले होते आ रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग ने अब शिक्षकों के तबादलों के लिए एक नई नियमावली बनाई है। इस नियमावली को जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा. इस नियमावली में सुगम और दुर्गम के स्थान पर प्रदेश को पर्वतीय और मैदानी दो भागों में बांटा गया है। जिनमें की गई सेवा के अंकों के आधार पर शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। नियमावली में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी शिक्षक का 10वीं या 12वीं का बोर्ड परीक्षाफल लगातार दो साल तक खराब रहा, तो उन्हें अनिवार्य रूप से पहाड़ों में भेजा जाएगा। प्रदेश में कम से कम 16 अंक वाले शिक्षक अनिवार्य तबादलों के लिए पात्र होंगे।

सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे तबादले

शिक्षकों के अनिवार्य तबादले पर्वतीय से मैदानी और मैदानी से पर्वतीय क्षेत्रों में की गई सेवा के गुणांक के आधार पर तैयार पात्रता सूची से किए जाएंगे। तबादले विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। नियमावली में उत्तराखंड के चार जिले उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर उच्च पर्वतीय जिले होंगे। जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत और नैनीताल जिलों के वे क्षेत्र जो मैदानी क्षेत्रों में शामिल नहीं किया गया है, वे निम्न पर्वतीय जिले कहलाएंगे। शिक्षक को मैदानी या पर्वतीय क्षेत्र में न्यूनतम सेवा पूरी करनी होगी। शिक्षक को पर्वतीय क्षेत्र के उप क्षेत्र में अधिकतम पांच साल और मैदानी क्षेत्र के उप क्षेत्र में भी अधिकतम पांच साल की सेवा करनी होगी। इसी प्रकार, पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र की अन्य सेवाओं को भी समय के अनुसार विभाजित किया गया है।

तबादले पर शिक्षक का अधिकार नहीं होगा

नियमावली के अनुसार एक जनवरी से शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया आरंभ होगी और 31 मार्च को तबादला आदेश जारी करने की अंतिम तिथि होगी। तबादले पर तैनात शिक्षक का मूल अधिकार नहीं होगा। यदि नियमावली लागू करने में किसी बिंदु पर व्यावहारिक समस्या आती है, तो विभाग या सरकार इस पर निर्णय लेगी। हालांकि शिक्षकों को पूरे सेवाकाल में एक बार संवर्ग परिवर्तन की अनुमति दी जाएगी। लेकिन इसके लिए शिक्षक को एक संवर्ग में कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करनी होगी। इसके अलावा SCERT, सीमैट, और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के लिए अलग कैडर बनने तक इसी नियमावली के तहत तबादले किए जाएंगे। वहीं, अविवाहित महिला को विवाह के बाद पति के कार्यस्थल या गृह जिले में तबादले के लिए एक बार छूट दी जाएगी। शिक्षा विभाग के अनुसार, नियमावली का कैबिनेट में एक बार प्रस्तुतिकरण हो चुका है, कुछ संशोधनों के बाद नियमावली को मंजूरी के लिए कैबिनेट में लाया जाएगा।