टिहरी गढ़वाल: दुख की हवा और बुरी किस्मत का साया बिना बुलाए पीछे-पीछे आता है। लाख कोशिश के बावजूद भी ये बुरी किस्मत हमारा पीछा नहीं छोड़ती।टिहरी में एक ऐसे ही बुजुर्ग हैं, नाम है भाग सिंह, मगर शायद यह दुनिया के सबसे अभागे व्यक्ति हैं। न ही पत्नी का साथ है, दो बेटों को खो चुके हैं, दिव्यांग हैं और कंधे पर दोनों बेटों की पत्नियों और बच्चों को पालने की जिम्मेदारी है। शायद अभागा शब्द का ईजाद टिहरी के भाग सिंह के लिए ही हुआ होगा। उन्होंने गरीब परिवार में जन्म लिया, दो बच्चों को मेहनत कर पढ़ाया, दोनों बच्चे नाइजीरिया की होटल में नौकरी करने लगे। कुछ सालों पहले उनका बड़ा बेटा भाव सिंह नाइजीरिया में बीमार पड़ा, उसको देहरादून इलाज के लिए लाया गया मगर इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अपने जीते जी अपने बड़े बेटे की मौत का सदमा उनको बेहद गहरा लगा। पत्नी 16 वर्ष पूर्व ही उनका साथ छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए दूर जा चुकी थीं।
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भाग सिंह के पास केवल दूसरे बेटे का ही सहारा था। मगर उनकी किस्मत देखिए। पहले बेटे की मौत के आंसू सूख ही रहे थे कि 24 अगस्त को उनके दूसरे बेटे की मौत की खबर भी सामने आ गई। भाग सिंह अब अंदर से पूरी तरह टूट चुके हैं शरीर उनका काफी पहले ही जवाब दे चुका है। विकलांग भाग सिंह के कंधों पर अपने दोनों बेटों के 2 बच्चों और 2 बहुओं को पालने-पोसने की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में उनके परिवार के ऊपर एक बड़ा संकट आन पड़ा है। गांव में लोग मदद भी करेंगे मगर आखिर कब तक। परिवार के पास पैसा कमाने का कोई भी जरिया फिलहाल नहीं है। ऐसे में परिवार के ऊपर एक बड़ा आर्थिक संकट भी मंडरा रहा है। वहीं दूसरे बेटे की मौत के बाद से उनके पास से जीने की आखरी वजह भी छिन चुकी है। नाइजीरिया में उनके दूसरे बेटे का शव है मगर भारत लाने का कोई भी साधन नहीं है। भाग सिंह के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे अपने दूसरे बेटे का शव भारत ला सकें। ऐसे में उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बेटे का शव नाइजीरिया से उत्तराखंड तक लाया जाए।
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बचपन से ही गरीबी में पले टिहरी के भाग सिंह को नसीब में कभी खुशियां नहीं मिलीं। जन्म से ही विकलांग भाग सिंह ने किसी तरह अपने दो बच्चों भाव सिंह और जबर सिंह को पढ़ाया और उनको नाइजीरिया नौकरी के लिए भेजा। मगर उनको क्या पता था कि उनके जीवन की बचीकुची खुशियां भी उनसे छिन जाएंगी। कुछ सालों पहले नाइजीरिया में बड़े बेटे भाव सिंह की तबीयत बिगड़ी। देहरादून इलाज के लिए लाया गया मगर दुर्भाग्य से उनके बड़े बेटे ने दम तोड़ दिया। बड़े बेटे की मृत्यु को ज्यादा वक्त नहीं हुआ था कि किस्मत ने एक बार फिर उन पर जोरदार प्रहार किया और नाइजीरिया में उनके दूसरे बेटे जबर सिंह की मृत्यु की खबर बीते 24 अगस्त को सामने आई। उनकी मृत्यु की खबर सुनकर पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है। अपने भाई की मृत्यु के बाद अपने परिवार के भरण-पोषण की सारी जिम्मेदारी जबर सिंह के कंधों पर थी और वे ही पूरा घर संभाल रहे थे मगर अब जबर सिंह की मृत्यु के बाद भाग सिंह के कंधों पर यह जिम्मेदारी आ गई है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार से अपने बेटे के शव को नाइजीरिया से भारत वापस लाने की गुहार लगाई है।