उत्तरकाशी: हिमालय में फैला हुआ हरी और मखमली घास एवं औषधीय पौधों से भरा मैदान जिसको बुग्याल कहते हैं, उसके संरक्षण के लिए उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक अनोखा प्रयोग किया गया है। बता दें कि उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में हिमशिखरों की तलहटी में जहां टिम्बर रेखा समाप्त हो जाती है वहां से यह हरे-भरे मैदान आरंभ होना शुरू हो जाते हैं। इन्हीं मैदानों को बुग्याल कहा जाता है। इन्हीं के संरक्षण के लिए उत्तरकाशी जिले में एक अनोखा प्रयोग हुआ है। यह शुरुआत हुई है समुद्रतल से 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल से। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 50 किमी दूर दयारा बुग्याल 30 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां तकरीबन 600 मीटर क्षेत्र में जूट एवं नारियल के रेशों से जाल तैयार किया गया है। पिरूल (चीड़ के पत्तों) के चेक डैम बंडल और बांस के खूंट से ट्रीटमेंट किया गया है। जाल के बीच मे बुग्याल प्रजाति का रोपण भी किया गया है।
">उत्तरकाशी के वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी संदीप कुमार का कहना है कि बुग्यालों का इस तरह तकनीक से संरक्षण पहली बार हो रहा है। यह तकनीक पूरी तरह से इकोफ्रेंडली है। इसके संरक्षण के लिए प्रशासन भी काफी प्रयास कर रहा है।