उत्तराखंड में नरभक्षी बाघ का आतंक, सालभर में 4 वनकर्मियों को बना चुका है निवाला

कॉर्बेट का नरभक्षी बाघ वनकर्मियों के लिए आतंक का सबब बन गया है, पिछले एक साल में 4 वनकर्मी बाघ का शिकार बन चुके हैं...

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उत्तराखंड में नरभक्षी गुलदारों के साथ-साथ नरभक्षी बाघ भी आतंक का सबब बने हुए हैं। पिछले दिनों कालागढ़ टाइगर रिजर्व में गुलदार ने एक फॉरेस्ट गार्ड पर हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में रहने वाले बाघ भी हिंसक हो रहे हैं, लोगों पर हमला कर रहे हैं। पिछले सालभर के भीतर टाइगर रिजर्व का नरभक्षी बाघ चार वनकर्मियों की जान ले चुका है। बाघ के हमले की बढ़ती घटनाओं से वनकर्मियों का मनोबल टूट रहा है। बचाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम ना होने की वजह से उनमें नाराजगी है। उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी ने भी बाघ के हमले की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक साल के भीतर दो जगहों पर बाघों के चार हमले की घटनाएं हुई हैं। ये चिंताजनक है। इस संबंध में भारतीय वन्यजीव संस्थान से गहन अध्ययन कराया जाएगा। बाघों के हिंसक होने की असल वजह तभी पता चलेगी।

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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों के रहने और भोजन की भरपूर उपलब्धता है। इसके बावजूद बाघ इंसानों का शिकार कर रहे हैं। एक साल के भीतर बाघ 4 वनकर्मियों की जान ले चुके हैं, जबकि इससे पहले 18 साल में ऐसी सिर्फ 6 घटनाएं रिकॉर्ड की गई थीं। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में ढाई सौ से ज्यादा बाघ हैं। पिछले साल नवंबर में बाघ ने ढिकाला रेंज में एक वनकर्मी पर हमला किया था। जुलाई में खनसूर और अगस्त में ढिकाला में बाघ के हमले में दो वनकर्मियों की जान गई। अब चौखम क्षेत्र में बाघ ने एक वनकर्मी को मार डाला। ढिकाला रेंज और खनसूर-चौखम की सीमाएं आपस में मिलती हैं। बाघों के हिंसक व्यवहार ने वन विभाग की नींद उड़ाकर रख दी है। विभाग इस संबंध में अध्ययन कराने की तैयारी कर रहा है, अध्ययन की जिम्मेदारी भारतीय वन्यजीव संस्थान को सौंपी जाएगी, ताकि बाघों के व्यहार में आए बदलाव की असल वजह का पता लगाया जा सके।


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