देवभूमि के सपूत ने बढ़ाया मिट्टी का मान, अदम्य साहस के लिए मिला तटरक्षक मेडल

कोस्ट गार्ड DIG सुरेंद्र सिंह डसीला को अदम्य साहस और वीरता के लिए प्रतिष्ठित तटरक्षक मेडल (शौर्य) से सम्मानित किया गया है...

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सैन्य बलों में अपनी सेवा दे रहे उत्तराखंड के जांबाज लाल अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक हैं डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला, जो कि वर्तमान में मंगलौर स्थित कोस्ट गार्ड मुख्यालय में कमांडर कर्नाटक के पद पर तैनात हैं। हाल ही में बेरीनाग में हुए भारतीय तटरक्षक बल के अलंकरण समारोह में डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला को प्रतिष्ठित तटरक्षक मेडल (शौर्य) से नवाजा गया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला को मेडल देकर सम्मानित किया। प्रतिष्ठित तटरक्षक मेडल (शौर्य) से सम्मानित होने वाले डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला ने श्रीलंका के कोलंबों में मालवाहक जहाज डेनिएला में लगी आग बुझाकर 25 लोगों की जान बचाई थी। इस ऑपरेशन को उन्होंने कोस्ट गार्ड के जहाज 'शूर' की कमान संभालते हुए अंजाम दिया था। निगरानी जहाज 'शूर' भारत के हाईटेक निगरानी जहाजों में से एक है। प्रतिष्ठित तटरक्षक मेडल हासिल कर डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला ने उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है।

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डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं। वो मूलरूप से पिथौरागढ़ के गणाई गंगोली तहसील के रहने वाले हैं। देश सेवा की सीख उन्हें अपने पिता से मिली। उनके पिता स्वर्गीय दान सिंह डसीला भी सैनिक थे। पांचवी तक की पढ़ाई पिथौरागढ़ में करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, धौलपुर में एडमिशन लिया। पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला से ग्रेजुएशन करने के बाद ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से रक्षा प्रबंधन में पीजी किया। डसीला ने अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय सैन्य अधिकारी पाठ्यक्रम की पढ़ाई भी की है। साल 1991 में वो कोस्ट गार्ड का हिस्सा बने। उनकी वीरता की कहानियां बेहद मशहूर हैं। साल 2000 में उन्होंने जल दस्युओं के जहाज के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया था, जिसके लिए उन्हें भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला की पत्नी ज्योत्सना डसीला आचार्य नरेंद्र देव विद्यालय हल्द्वानी में टीचर हैं। राज्य समीक्षा टीम की तरफ से डीआईजी सुरेंद्र सिंह डसीला को ढेरों शुभकामनाएं, प्रतिष्ठित तटरक्षक मेडल (शौर्य) हासिल कर उन्होंने पहाड़ को गौरवान्वित किया है।


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