उत्तराखंड में कुपोषण से निपटने के लिए शानदार पहल, कुपोषित बच्चों को गोद लेंगे मंत्री-अफसर

त्रिवेंद्र सरकार ने कुपोषण से निपटने का शानदार तरीका निकाला है, अब कुपोषित बच्चों का जिम्मेदारी मंत्री-अफसर उठाएंगे...

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कुपोषण एक अभिशाप है। इससे निपटने के लिए रणनीतियां बनती हैं, बहस होती है, अभियान चलते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता। इन अभियानों की हकीकत क्या है, इसका अंदाजा आप यूं लगा सकते हैं कि उत्तराखंड में 17 हजार कुपोषित बच्चे हैं। यही नहीं 1600 बच्चे ऐसे हैं, जो अति कुपोषित कैटेगरी में आते हैं। शुक्र है प्रदेश सरकार अब कुपोषण से निपटने के लिए कारगर कदम उठाने जा रही है। अब उत्तराखंड का हर मंत्री और अधिकारी एक कुपोषित बच्चे को गोद लेगा। उसके पोषण का ध्यान रखेगा। कुपोषण के खिलाफ त्रिवेंद्र सरकार की जंग जारी है। इस जंग में अब प्रशासनिक अमले और मंत्रियों की भी सक्रिय भागीदारी होगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। अभियान के तहत सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत प्रदेश सरकार के सभी मंत्री और अधिकारी एक-एक कुपोषित बच्चे की देखभाल का जिम्मा उठाएंगे।

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अभियान की जिम्मेदारी शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग को सौंपी गई है। 3 सितंबर से व्यापक अभियान शुरू हो जाएगा। सचिवालय के 94 अफसरों को इस काम में लगाया गया है। ये अभियान पूरे प्रदेश में एक महीने तक चलेगा। अति कुपोषित बच्चों को इस दायरे से बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं, इन बच्चों को प्रदेश के मंत्री, विधायक और अधिकारी गोद लेंगे। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ जंग में लोगों को भी साथ देना होगा। हमें लोगों को ये बताना होगा कि वो बच्चों को पुष्टाहार दें। जानकारी ना होने की वजह से लोग बच्चों को पुष्टाहार नहीं देते। जबकि कुपोषित बच्चों के लिए लगातार पुष्टाहार भेजा जा रहा है। बहरहाल प्रदेश में कुपोषित बच्चों को इस दायरे से निकालने की कोशिशें तेज हो गई हैं, उम्मीद है इसके अच्छे नतीजे जल्द देखने को मिलेंगे।


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