देवभूमि के माथे से हटेगा माओवाद का कलंक, पुलिस ने तैयार किया स्पेशल प्लान

देवभूमि में सक्रिय माओवादियों का नेटवर्क तोड़ने के लिए पुलिस का एक्शन प्लान तैयार है, जानिए एक्शन प्लान की खास बातें...

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उत्तराखंड के कुछ पहाड़ी अंचल माओवादी गतिविधियों के लिए बदनाम रहे हैं। खासतौर पर कुमाऊं में कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां माओवादी अक्सर अपनी जड़े जमाने की कोशिश में लगे रहते हैं। कुछ महीने पहले उत्तराखंड के रहने वाले माओवादी खीम सिंह को यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया था। खीम सिंह के नाम पर 50 हजार रुपये का इनाम था। खीम सिंह से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि पहाड़ के कई इलाकों में अब भी माओवादी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इस सूचना ने खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट हैं, साथ ही माओवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए काम शुरू कर चुकी हैं। माओवादी गतिविधियां संचालित करने वाले लोग पुलिस के रडार पर हैं। डीआईजी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने माओवादियों की धरपकड़ के लिए एसओटीएफ गठित की है, जिसमें 20 लोग शामिल हैं। इस टीम का काम माओवादियों और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना है। उत्तराखंड में माओवाद पनपने का सिलसिला कब शुरू हुआ, ये भी बताते हैं।

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डेढ़ दशक पहले पुलिस को पहली बार हंसपुर खत्ता में माओवादियों का ट्रेनिंग कैंप संचालित होने की सूचना मिली थी। फिर ऐसे ही मामले नानकमत्ता और रुद्रपुर में शामिल आए। ऊधमसिंहनगर, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले में भी माओवादी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। माओवादियों ने साल 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव का विरोध भी किया था। साल 2017 पुलिस के लिए बड़ी सफलता लेकर आया। माओवादी देवेंद्र चम्याल और उसकी एक महिला साथी को पकड़ लिया गया। इनसे माओवादी नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिले। साल 2018 में भी दो माओवादी पकड़े गए। अब 50 हजार का इनामी खीम सिंह बोरा भी पुलिस की गिरफ्त में है। डीआईजी जगतराम जोशी ने खीम सिंह से पूछताछ के लिए एसओटीएफ और ऊधमसिंहनगर पुलिस को भेजा था। पूछताछ में मिले अहम सुरागों के बाद खुफिया विभाग ने माओवादियों के नेटवर्क को फिर से खंगालना शुरू कर दिया है। खीम सिंह के खिलाफ भी वारंट दाखिल किया जाएगा। माओवादी गतिविधियों में लगे लोगों पर पुलिस की नजर है, इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


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