उत्तराखंड में दुनिया का सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन... ITBP के जवानों को सलाम

नंदा देवी चोटी फतह करने निकले लापता 8 लोगों में से 7 के शव आईटीबीपी ने खोज लिए हैं, इन्हें बेस कैंप तक लाने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है।

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पर्वतों को जीतना आसान नहीं है। हर साल कई पर्वतारोही विश्व की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने के इरादे से निकलते हैं, पर इनमें से कई जीत का जश्न मनाने के लिए जिंदा नहीं रहते। 13 मई को 8 दिलेर पर्वतारोहियों का एक दल भी उत्तराखंड की नंदा देवी चोटी को फतह करने निकला था, पर एवलांच की वजह से दल के आठों सदस्य लापता हो गए। एक महीने तक इनकी तलाश हुई, और बाद में इन्हें लेकर बुरी खबर मिली। पता चला कि सभी आठों पर्वतारोहियों की एवलांच की चपेट में आने से मौत हो गई है। इनमें से सात के शव बरामद भी कर लिए गए। पर इन शवों को बेस कैंप तक पहुंचाना आसान काम नहीं था। शव पिंडारी की तरफ गिर गए थे, जिन्हें मर्तोली तक लाने के लिए आईटीबीपी के जवानों ने 11 घंटे लंबा ऑपरेशन चलाया। 4 पर्वतारोहियों के शवों को 18900 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया है। बाकि तीन शवों को लाने के लिए मंगलवार को ऑपरेशन चलाया जाएगा। शवों को 450 मीटर की खड़ी दीवार से नीचे उतारने के बाद बेस कैंप पहुंचाया जाएगा।

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ये विश्व में अपनी तरह का ऐसा पहला अभियान है, जो कि तकनीकी रूप से बेहद कठिन है। आईटीबीपी के कमान अधिकारी आरएस सोनाल के नेतृत्व में 18 हिमवीरों ने इस अभियान को अंजाम दिया। जवान बर्फ और खतरनाक दर्रो के बीच शवों को लेकर तीन किलोमीटर चलकर 18900 फीट की ऊंचाई पर स्थित चोटी तक पहुंचे। इस दल में कुशल पर्वतारोही शामिल हैं। एक शव को पहुंचाने में 3 घंटे का समय लगा। आईटीबीपी पूरे सम्मान के साथ शवों को बेस कैंप तक ला रही है। सभी पर्वतारोहियों के शव 15600 फीट पर स्थित बेस कैंप में लाए जाएंगे। जहां से इन्हें हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ भेजा जाएगा। लगातार हो रही बर्फबारी और कठिन दर्रों की यात्रा कर आईटीबीपी के जवानों ने इस काम को पूरा कर लिया है। आपको बता दें कि 13 मई को 8 पर्वतारोहियों का एक दल नंदा देवी चोटी की चढ़ाई के दौरान लापता हो गया था। इनमें 4 ब्रिटेन और 2 अमेरिका के नागरिक थे। आस्ट्रेलिया के 1 नागरिक के साथ ही एक भारतीय पर्वतारोही भी दल का हिस्सा था। एवलांच की चपेट में आने से इन आठों पर्वतारोहियों की मौत हो गई, जिनमें से 7 के शव खोज लिए गए हैं।


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