केदारनाथ में जिस ताल की वजह से मची थी तबाही..6 साल बाद वहां दिखे बड़े बदलाव

चोराबाड़ी ताल एक बार फिर पुनर्जीवित हो रहा है, यहां लगातार भूगर्भीय बदलाव हो रहे हैं, हालांकि इससे केदारघाटी को फिलहाल कोई खतरा नहीं है..

CHORABARI TAAL KEDARNATH - उत्तराखंड न्यूज, लेटेस्ट उत्तराखंड न्यूज, केदारनाथ आपदा, केदारनाथ आपदा चोराबाड़ी ताल, चोराबाड़ी ताल केदारनाथ, Uttarakhand News, Latest Uttarakhand News, Kedarnath Disaster, Kedarnath Disaster Chorabad, uttarakhand, uttarakhand news, latest news from uttarakhand

वो जून का ही महीना था, जब साल 2013 में आई जलप्रलय ने पूरी केदारघाटी को तबाह कर दिया था। उस वक्त लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से केदारनाथ के पास स्थित चोराबाड़ी ताल का बड़ा हिस्सा ढह गया था। जिसके बाद ताल का पानी सैलाब की शक्ल में तबाही मचाते हुए आगे बढ़ चला। सैलाब आगे बढ़ता गया और पीछे छूट गए तबाही के निशान, जो आज भी देखे जा सकते हैं। कई साल बीत गए लेकिन आपदा के जख्म अब भी ताजा हैं। साल 2013 में उत्तराखंड में बड़ी तबाही मचाने वाले चोराबाड़ी ताल में अब बड़े बदलाव हो रहे हैं, जिन पर वैज्ञानिक नजर बनाए हुए हैं। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक तालाब के चारों तरफ फैला ग्लेशियर टुकड़ों में टूट रहा है और ये ताल एक बार फिर जिंदा होने लगा है। इन दिनों तालाब में पानी भरा हुआ है। हालांकि वैज्ञानिक ये भी कह रहे हैं कि फिलहाल इस ताल का भरना केदारघाटी के लिए खतरे का संकेत नहीं है। पर फिर भी रिस्क नहीं लिया जा सकता। भू-वैज्ञानिक जल्द ही इस इलाके का दौरा करेंगे। जिला आपदा प्रबंधन की टीम को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। ये टीम चोराबाड़ी में पहुंचकर वहां के हालात का जायजा लेगी और अपनी रिपोर्ट डीएम को देगी।

यह भी पढें - केदारनाथ में हेलीकॉप्टर कंपनी की दादागीरी?..आधे घंटे तक तड़प-तड़प कर श्रद्धालु की मौत
चोराबाड़ी ताल एक बार फिर से पुनर्जीवित हो रहा है। ताल के खुले हिस्से में पानी जमा है। ताल के चारों तरफ बर्फ की मोटी चादर फैली है। 15 जून को सिक्स सिग्मा के सीईओ डॉ. प्रदीप भारद्वाज के नेतृत्व में एक टीम इस इलाके में पहुंची और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में लगातार भूस्खलन हो रहा है। आपदा के वक्त यहां पर जो मैदान बना था, उनमें भी 4 मीटर तक पानी भरा है। ग्लेशियर तेजी से चटक रहे हैं। हालांकि पानी का बहाव कम है, जिस वजह से आने वाले कई दशकों तक नीचले इलाकों पर कोई संकट नहीं आएगा। पर असली तस्वीर तभी साफ हो पाएगी, जब इस जगह का स्थलीय निरीक्षण और भूगर्भीय अध्ययन होगा। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक जल्द ही चोराबाड़ी ताल और पूरे क्षेत्र अध्ययन करेंगे, जिसकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि सिक्स सिग्मा की टीम से ताल के बारे में पूरी जानकारी ली गई है, जल्द ही भू-वैज्ञानिकों को यहां के दौरे के लिए बुलाया जाएगा।


Uttarakhand News: CHORABARI TAAL KEDARNATH

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें