आप देहरादून में जमीन खरीद रहे हैं? तो ये खुशखबरी पढ़ लीजिए..अब नहीं होगी धोखाधड़ी

जो लोग देहरादून में आशियाना बनाने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए ये एक जरूरी खबर है। जमीन खरीदने से पहले इसे जरूर पढ़ें...

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पहाड़ की जमीन पर भूमाफिया कब्जा कर अवैध निर्माण कर रहे हैं। कुछ चालबाज प्रॉपर्टी डीलर भोले-भाले लोगों को बेवकूफ बनाकर उन्हें वो जमीन भी बेच देते हैं, जो कि कृषि भूमि होती है। जमीन की खरीद-फरोख्त का सालों से चल रहा ये धंधा अब जल्द ही बंद होने वाला है। एमडीडीए ने इस खेल को खत्म करने की तैयारी पूरी कर ली है। भूमाफिया पर शिकंजा कसने के लिए एमडीडीए अपने सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। अवैध निर्माण रोकने के लिए एमडीडीए ने नक्शा पास करने के सिस्टम को ऑनलाइन कर दिया है। अब इसमें प्राधिकरण क्षेत्र के सभी खसरा नंबर दाखिल किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को नए मास्टर प्लान में मर्ज किया जा रहा है। इससे होगा ये कि जब भी किसी भूखंड का नक्शा दाखिल किया जाएगा तो संबंधित खसरा नंबर के लिए जिन निर्माणों की अनुमति होगी उनकी पूरी लिस्ट सामने आ जाएगी।

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यानि अगर जमीन कृषि भूमि है, तो उस पर भवन निर्माण का नक्शा दाखिल ही नहीं हो पाएगा। इस तरह अवैध निर्माण से जुड़े मामले पहले ही पकड़ में आ जाएंगे, जिससे इन पर रोक लगाना आसान होगा। आसान क्या, समझ लीजिए कि अवैध निर्माण की गुंजाइश ही खत्म हो जाएगी। इस वक्त भवन निर्माण की क्या व्यवस्था है, वो भी आपको बता देते हैं। दरअसल अभी पहले नक्शा दाखिल होता है, और उसके बाद उसके भू-उपयोग की जांच की जाती है। इसमें कई दिन लगते हैं। इसी का फायदा भू माफिया उठाते हैं। जब तक भू उपयोग की जांच पूरी होती है, तब तक जमीन पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका होता है। इससे जमीन बेचने वाले का तो कुछ नहीं होता, लेकिन जिस बेचारे ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर जमीन का टुकड़ा लिया होता है, वो सड़क पर आ जाता है। क्योंकि अवैध निर्माण को प्रशासन सील कर देता है।

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अवैध निर्माण जब भू-उपयोग के मामले में फंसता है तो इसे भ्रष्ट कर्मचारी भी अपने लिए मौका समझ लेते हैं और जमीन खरीदने वाले को लूटना शुरू कर देते हैं। सेटिंग-गेटिंग का खेल खूब चलता है। पर एमडीडीए अब जो करने जा रहा है उससे ये खेल बंद हो जाएगा। क्योंकि जो जमीन अधिकृत होगी उसी का नक्शा दाखिल हो पाएगा। यही नहीं एमडीडीए की वेबसाइट पर जल्द ही सभी खसरा नंबर व उसके भू-उपयोग की जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे लोग जमीन खरीदने से पहले ही उसके उपयोग के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे। एमडीडीए ने सिस्टम को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है, ये जनहित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे दून में होने वाले अवैध निर्माण पर रोक लगेगी, साथ ही आम लोगों के हितों की भी रक्षा होगी।


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