देवभूमि के शौर्यम को बधाई...नासा-गूगल ने दिया ईनाम, 15 साल की उम्र में बने लखपति

ऊधमसिंहनगर के लाल शौर्यम की प्रतिभा का लोहा एप्पल और गूगल ने भी माना है..पिछले एक साल के भीतर ही वो कई उपलब्धियां हासिल कर लखपति बन गए हैं।

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उत्तराखंड के होनहार लाल शौर्यम को ढेर सारी बधाई...शौर्यम की प्रतिभा का आईटी की नामी कंपनी एप्पल-गूगल ने ना सिर्फ लोहा माना है, बल्कि उन्हें पुरस्कृत कर उनकी प्रतिभा को सराहा भी है...15 साल की जिस उम्र में बच्चे मोबाइल-वीडियोगेम से चिपके रहते हैं, उस उम्र में ऊधमसिंहनगर के रहने वाले शौर्यम लखपति बन चुके हैं...उनकी उपलब्धियों के बारे में अगर हम आपको बताना शुरू करेंगे तो शायद शब्द ही कम पड़ जाएं। एक साल के भीतर ही शौर्यम को राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ-साथ पांच विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। रुद्रपुर के बागवाला में रहने वाले शौर्यम शुक्ला जेसीस पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ते हैं। उन्होंने गूगल आइटी के तत्वावधान में 7 मई को आयोजित ऑनलाइन परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था, तब उन्हें गूगल के द्वारा 500 डालर की धनराशि, 1 करोड़ का मेडिकल इंश्योरेंश, 50,000 रुपये की पठन-पाठन सामग्री व्यय और सालाना 24,000 का यातायात भत्ता मिला।

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शौर्यम ने नासा की तरफ से आयोजित अंतरिक्ष विज्ञान पर आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भी पहला स्थान प्राप्त किया, जिसमें उन्हें 84 हजार रुपये की धनराशि पुरस्कार स्वरूप मिली। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के की तरफ से आयोजित इंटरनेशनल रीजनल टैलेंट हंट टेस्ट 2019 में जीत हासिल करने पर उन्हें 15 हजार डालर की स्कॉलरशिप मिली। इसके अलावा शौर्यम ने राष्ट्रपति भवन सचिवालय नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय राजनैतिक परीक्षा 2019 में दूसरा स्थान हासिल किया। इसमें उन्हें पुरस्कार के रूप में 2 लाख 30 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्हें 12वीं कक्षा तक 26 हजार रुपए की राशि हर साल दी जाएगी। पिछले साल जून में एप्पल की तरफ से ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें शौर्यम शुक्ला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। परीक्षा का परिणाम 13 मई 2019 को घोषित किया, इसके तहत शौर्यम को 60,000 डालर की स्कॉलरशिप दी गई। शौर्यम के पिता राधेश्याम शुक्ला एडवोकेट हैं, जबकि मां मंजू शुक्ला गृहणी हैं।

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शौर्यम बचपन से ही पिता का नाम रोशन करना चाहते थे, आईटी में उनकी विशेष रुचि थी। वो तब केवल 4 साल के थे जब पिता के मोबाइल पर गूगल सर्च कर आईटी रिलेटेड जानकारियां हासिल करते थे। स्कूल में भी कंप्यूटर क्लासेज में उनकी विशेष रुचि थी। बच्चे का इलेक्ट्रानिक गैजेट्स से जुनून की हद तक लगाव देखकर पहले तो माता-पिता भी डर गए थे, पर बाद में उन्होंने शौर्यम के इस रुझान को सही दिशा देने की ठानी। 8वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान शौर्यम ने गूगल पर स्कॉलरशिप और प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में पढ़ना और आवेदन करना शुरू कर दिया। वो प्रतिभाशाली तो थे ही, साल 2018 में शौर्यम ने कई ऑनलाइन परीक्षाएं दीं और नासा की तरफ से आयोजित प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। यही नहीं नेशनल पॉलिटीकल कंपटीशन में वो दूसरे स्थान पर रहे, तब उन्हें राष्ट्रपति ने खुद सम्मानित किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि शौर्यम को अब तक पुरस्कार में 50 लाख रुपये से अधिक की स्कॉलरशिप और विदेश में मुफ्त पढ़ाई का ऑफर मिल चुका है। भई बेटा हो तो शौर्यम जैसा, जिसने अपने शौक से इतनी कम उम्र में ही ऐसे कीर्तिमान गढ़ लिए हैं जिनके बारे में आप और हम सोच भी नहीं सकते। शौर्यम को राज्य समीक्षा की तरफ से ढेरों बधाई...तुम यूं ही आगे बढ़ते रहो और प्रदेश का गौरव बढ़ाते रहो।


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