देवभूमि का चैतोला मेला..विदेशों से भी पहुंचे प्रवासी लोग..जानिए इस परंपरा की खासियत

चैतोला मेला शुरू हो गया है, उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं की झलक देखनी है तो चैतोला मेले में चले आईए। देखिए वीडियो

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उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और आस्था का संगम देखना है तो लोहाघाट चले आइए, जहां गुमदेश क्षेत्र का प्रसिद्ध चैतोला मेला शुरू हो गया है। चैतोला मेला तीन दिन तक चलेगा। रविवार को चमलदेव के चौखाब बाबा मंदिर में मेले का विधिवत् शुभारंभ हुआ। चमू देवता के धामी जगत सिंह ने मेले का शुभारंभ किया। चैतोला मेला बेहद खास मौका होता है, क्योंकि इस दौरान बाहर रहने वाले प्रवासी भी अपने घर वापस लौट आते हैं, ताकि चमू देवता का आशिर्वाद ले सकें। लोग पूरे साल भर इस मेले के शुरू होने का इंतजार करते हैं। यही नहीं इस दौरान एक अनोखी परंपरा भी निभाई जाती है। मेले के वक्त यहां कोई होटल नहीं खुलता, जो कोई भी क्षेत्र में आता है चाहे वो अपना हो या फिर पराया, उसे ग्रामीण अपने घर में बुलाकर प्रेम से भोजन कराते हैं। मेले के पहले दिन चमू देवता के डोले को चमू देवता के मंदिर से मड़ गांव ले जाया गया।

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सोमवार को मड़ गांव से चमू देवता की शोभायात्रा निकली। इस दौरान मड़ गांव से डोले में चमूदेवता के डांगर अवतरित होकर श्रद्धालुओं के साथ चौखाम बाबा मंदिर आए। चमू देवता को पापड़ का प्रसाद चढ़ाने के बाद ही त्योहार में बने व्यंजन किसी को दिए जाते हैं। लोहाघाट में लगने वाला ये मेला इतिहास और आस्था का अनूठा संगम है। कहते हैं कि जब पांडव उत्तराखंड प्रवास पर आए थे तो वो यहां पर शिव मंदिर बनाना चाहते थे। पांडवों ने हर दिशा में तीर छोड़े, लेकिन कोई बाण नहीं रुका, तब कुंती ने अपने आंचल में एक बाण को रोक दिया, तब से इस जगह का नाम रुकमीचौड़ (चमदेवल) पड़ गया। पांडवों ने यहां शिव शक्ति की स्थापना की। कत्यूर राजा के बाद शिव के अनन्य भक्त चमू ने यहां पर राज किया। उनके समय में यहां एक अत्याचारी दैत्य का आतंक था। चमू देव ने केदार के बलशाली पुत्रों लाटा, भराड़ा, रुद्र की मदद से दैत्य का वध कर दिया। इससे चमू के पराक्रम और न्याय की ख्याति चारों तरफ फैल गई । उन्हें लोग चौखाम कहने लगे।

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तबसे चैत्रीय नवरात्र में यहां मेला लगता है। 16 अप्रैल को यहां व्यापारिक मेला आयोजित होगा। मेले में सुरक्षा की के लिए पुलिस और फायर बिग्रेड की तैनाती की गई है। मेले के शुभारंभ के मौके पर विशिष्ट अतिथि लाटा देवता के धामी जोगा सिंह, रुद्र देवता के धामी लक्ष्मण सिंह, भराड़ा के धामी तारा सिंह ने क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। देखिए वीडियो

#गुमदेश का चैतोला। गुमदेश चम्पावत जिले का नेपाल से लगा क्षेत्र है जहां हर साल चैत्र नवरात्रि की नवमी, दशमी और एकादशी को चैतोला मेला आयोजित होता है। मेले में स्थानीय लोक देवता चौखाम बाबा के रथ को ढोल-नगाड़ों के घोष के साथ लाया जाता है।

Posted by Dankaram on Monday, April 15, 2019


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