पहाड़ का शहीद सपूत...इधर देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, उधर पिता को दिया जा रहा था तिरंगा

एक तरफ देश गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा था और दूसरी तरफ पहाड़ में शहीद के घर पर खामोशी पसरी थी..आज जरा याद कीजिए वो कुर्बानी

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हमारी कोशिश रहती है कि देवभूमि के वीर सपूतों की वीरता की कहानियां बार बार आपके सामने लाते रहें। क्योंकि ये जवान हैं, तो हम हैं। आज उस वीर की कहानी जो तिरंगे का मान रख शहीद हुआ …साल 2018, जनवरी का महीना...देश गणतंत्र दिवस की तैयारियों में डूबा था। इस बीच 24 जनवरी को एक दुखद खबर आई थी। चमोली जिले के गंडासू गांव का बेटा जगदीश प्रसाद पुरोहित सीमा पर आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गया था। गणतंत्र दिवस यानी 25 जनवरी को देश तिरंगा फहरा कर गणतंत्र की खुशी मना रहा था रहा था, वहीं दूसरी ओर शहीद के पिता को वो तिरंगा सौंपा जा रहा था जिसमें लिपट कर सपूत आया था... चमोली जिले का लाल लाखों - करोड़ों आंखों में आंसू देकर चला गया और देशभक्ति की एक मशाल सभी के दिलों में जला गया था। जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान पहाड़ के वीर सपूत जगदीश पुरोहित को गोली लगी थी। इसके बाद जगदीश को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जब तक सांस थी वो मौत से लड़ते रहे और आखिर में जान गंवाकर चले गए।

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अस्पताल में ही जगदीश पुरोहित ने दम तोड़ दिया था। शहीद जगदीश का ढाई साल का बेटा है और 6 साल की एक प्यारी सी बच्ची है। जगदीश पुरोहित अभी सिर्फ 34 साल के थे और 16 साल पहले गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए थे। वो जम्मू कश्मीर के राजौरी में तैनात थे। 23 जनवरी को जम्मू कश्मीर के राजौरी में आतंकियों ने नापाक इरादे जाहिर किए।भारत में घुसपैठ की कोशिशों में लगे आतंकियों ने भारतीय जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। भारतीय सेना के जवानों ने आतंकियों की हर गोली का मुंहतोड़ जवाब दिया। लेकिन इस मुठभेड़ में उत्तराखंड का एक और वीर सपूत वीरगति को प्राप्त हो गया। जगदीश को इस मुठभेड़ में उन्हें गोली लग गई थी। घायल हालत में उन्हें राजौरी स्थित सेना के हॉस्पिटल भर्ती कराया गया ता और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। 34 वर्षीय शहीद जगदीश चमोली जिले के विकासनगर घाट ब्लाक के गंडासू गांव के निवासी थे।


Uttarakhand News: story of martyer jagdish of chamoli

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