उत्तराखंड का सेमल...अस्थमा, डायरिया जैसी कई बीमारियों का इलाज..जानिए इसके फायदे

उत्तराखंड में कई वनस्पतियां ऐसी हैं...जिनमें गंभीर बीमारियों का इलाज छुपा है। आइए आज सेमल के बारे में जानते हैं।

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उत्तराखंड..जहां हमारे बुुजुर्गों ने हमेशा प्रकृतिक इलाज को तरजीह दी है। आज जब विज्ञान नैचरोपैथी और आयुर्वेद की तरफ जा रहा है, तो लगता है कि वास्तव में हमारे पूर्वज ही सही थी। कुल मिलाकर कहें तो देवभूमि कई प्राकृतिक संपदाओं की भूमि रही है। इन्हीं में से एक है सेमल...यूं तो ये वृक्ष दुनियाभर में ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाता है लेकिन उत्तराखंड में ये बड़ी मात्रा में पाया जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे बोम्बैक्स सीबा‌ कहा जाता है। जनवरी से मार्च के बीच सेमल में सुर्ख गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं। ये फूल खूबसूरत तो होते ही हैं साथ ही कई बीमारियों के इलाज में काम आते हैं। यूं समझ लीजिए कि इसके रूई से लेकर इसके फूल, पत्ते और छाल आपके जिंदगी के हर छोटे मोटे काम में इस्तेमाल हो सकते हैं। तो आइए सबसे पहले आपको इसके औषधीय गुणों के बारे में बता देते हैं। पेट की बीमारियां ,पित्त की अधिकता ,फोड़े-फुंसियां , डायरिया ,बवासीर और ना जाने कितनी तरह की बीमारियां इससे ठीक होती हैं। आगे जानिए

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शरीर में चर्मरोग की मुख्य वजह खून में उपस्थित अशुद्धियां होती हैं। अगर आप इन समस्‍याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो सेमल की पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं। सेमल की ताजी पत्तियां तोड़ें और इन्‍हें पानी के साथ पीस लें। इस पिसे हुए पेस्‍ट में एक गिलास पानी मिलाकर इसे कपड़े से छान लें और फिर इसका सेवन करें। ये आपके रक्‍त को साफ करने में मदद करता है।आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल अस्‍थमा, खून की कमी, दस्‍त जैसी समस्‍याओं से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। अगर हम आपको सेमल के फायदे के बारे में बता रहे हैं तो इसका मतलब ये है कि सेमल में ऐसे पोषक तत्‍व अच्‍छी मात्रा मौजूद हैं जो कि आपको विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने में मदद करते हैं। रिसर्च के दौरान पता चलता है कि सेमल के पेड़ और इसके सभी भागों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड, वसा, विटामिन ए और विटामिन सी मौजूद रहते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। सेमल की जड़ों का उपयोग कर आप कोलेरा, क्षय रोग संबंधी फोड़े , मूत्र से संबंधी परेशानियां, पेट दर्द जैसी समस्‍याओं का उपचार कर सकते हैं।


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