MBBS के बाद डॉक्टर बन सकती थी ये बेटी..समाज के लिए कुछ करने की सोच ने बनाया IAS

अपराजिता हमेशा से ही समाज के लिए कुछ बेहतर करना चाहती थीं। उनकी इसी सोच ने उन्हें आईएएस अफसर बनने की प्रेरणा दी।

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कहते हैं कुछ कहानियां मन को भा जाती हैं। कुछ ऐसी प्रेरणादायक कहानियां...जिन्हें पढ़कर किसी की जिंदगी का संघर्ष आपकी जिंदगी के लिए प्रेरणा बन सके। वास्तव में ऐसी ही कहानियां ही आज के दौर में दिल में बैठी नकारात्मकता को दूर करती हैं। राज्य समीक्षा की हमेशा कोशिश रही है कि आप तक ऐसी सच्ची और अच्छी कहानियां लेकर आएं। आज की कहानी है अपराजिता की...अपराजिता ने एमबीबीएस किया है। वो चाहतीं तो एक सफल डॉक्टर के तौर पर मेडिकल फील्ड में काम कर सकती थीं, लेकिन अपराजिता समाज के लिए कुछ बेहतर...कुछ सार्थक करना चाहती थीं और उनकी इसी सोच ने उन्हें सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा दी। इससे पहले वे रोहतक से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही थीं। उनके पिता भी डॉक्टर हैं और फिलहाल भरतपुर में अस्पताल संचालित करते हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई रोहतक में ही हुई। उनके परिवार में सभी डॉक्टर हैं इसलिए उन्हें भी मेडिकल की पढ़ाई करनी पड़ी। आगे जानिए...किस तरह से अपराजिता ने अपना सपना पूरा किया।

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अपराजिता के पिता डॉ. अमर सिंह सिनसिनवार हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं तो मां डा. नीतन स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। पहले वो गवर्नमेंट हॉस्पिटल में डॉक्टर थे जहां से वीआरएस लेने के बाद अब नर्सिंग होम संचालित करते हैं। अपराजिता कहती हैं कि मुझे लगता था कि अगर समाज के लिए अच्छे काम करने हैं तो सिविल सर्विस इसके लिए सबसे बेहतर माध्यम होगा। 2017 में मेरी एमबीबीएस की पढ़ाई खत्म हो गई थी और मैंने अपनी तैयारी शुरू कर दी। जून 2017 में मैंने अपना पहला अटेंप्ट दिया, लेकिन सफल नहीं हो पाई। क्योंकि तैयारी नहीं थी। पर अपराजिता इस असफलता से टूटीं नहीं, उन्होंने दोगुनी मेहनत से तैयारी करना शुरू कर दिया। इसके बाद साल 2018 में उन्हें सफलता हासिल हुई। सिविल सर्विस परीक्षा में उन्होंने 82वीं रैंक हासिल की। अपराजिता अपने तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके दो छोटे भाई भी एमबीबीएस डॉक्टर हैं। अपराजिता कहती हैं कि अगर लगन और मेहनत से पढ़ाई की जाए तो सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है।


Uttarakhand News: STORY OF IAS APARAJITA

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