IPS अफसर ने अपनी बेटी का एडमिशन आंगनबाड़ी में कराया, स्कूल में ही खिलाया मिड डे मील

SP ने अपनी बेटी का एडमिशन आंगनबाड़ी केंद्र में करा के मिसाल पेश की है। पहले दिन स्कूल पहुंची अंबावीर ने साथी बच्चों के साथ पढ़ाई की, साथ ही वहां बना मिड डे मील भी खाया।

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सरकार सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए जी-जान से जुटी है, लेकिन ये कोशिशें तब तक सफल नहीं होंगी, जब तक लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने नहीं भेजेंगे। सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों की क्या मानसिकता है, ये हम सभी अच्छी तरह जानते हैं, इसके बावजूद ऐसे कई सरकारी अफसर हैं जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। वो जानते हैं कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था तब तक नहीं सुधरेगी, जब तक लोग खुद अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने नहीं भेजेंगे। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के आईपीएस डॉ. यशवीर सिंह ने ऐसी ही शानदार पहल की है। उन्होंने अपनी दो साल की बेटी अंबावीर का दाखिला शहर के विश्वेश्वरगंज स्थित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। अपनी मां के साथ पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची अंबावीर ने आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई करने के साथ ही अपने दूसरे साथियों के साथ मिड-डे का खाना भी खाया। गाजीपुर के एसपी डॉ. यशवीर कहते हैं कि अब अंबावीर नियमित आंगनबाड़ी जाएगी, सामान्य बच्चों के साथ पढ़ेगी और साथ ही पुष्टाहार भी ग्रहण करेगी।

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ऐसे वक्त में जबकि लोग अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाने के लिए होड़ लगाए हुए हैं....निजी स्कूलों में एडमिशन के लिए मारामारी मची है, उस वक्त में गाजीपुर के एसपी ने अपनी बेटी को आंगनबाड़ी केंद्र में भेजने का फैसला कर के मिसाल कायम की है। एसपी डॉ. यशवीर कहते हैं कि अगर सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने लगें तो निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी। हम भी सरकारी स्कूल में पढ़े-लिखे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में अंबावीर पहले दिन ही दूसरे बच्चों के साथ काफी घुलमिल गई। वो बेहद खुश थी। उसने एमडीएम में बने चावल-सब्जी को अन्य बच्चों के साथ पूरे चाव से खाया। अंबावीर की माता प्रियंका सिंह कहती हैं कि अम्बावीर बंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उदास रहती रही है, जबकि उसकी दुनिया तो यहां है....हम उम्र के बच्चों के बीच। आपको बता दें कि आईपीएस यशवीर सिंह से पहले उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के तीन प्रशासनिक अधिकारी भी अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेज चुके हैं। ये एक सराहनीय प्रयास है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है।


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