देहरादून की छात्रा की ईमानदारी को सलाम, देश के लिए मिसाल बन रहे हैं उत्तराखंडी

कुछ बातें तो हैं उत्तराखंड के लोगों में, जिस वजह से वो देश ही नहीं बल्कि दुनिया में मशहूर हैं। इन्हीं में से एक खास बात है ईमानदारी

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जैसा कि हम बार बार कहते हैं कि उत्तराखंड के लोगों में ईमानदारी कूट-कूटकर भरी है। आए दिन कोई ना कोई ऐसा किस्सा सुनने को मिलता है, जिसमें ईमानदारी की एक दास्तान छुपी होती है। आज हम आपको एक ऐसी ही शानदार कहानी बताने जा रहे हैं। कहानी ज़रा पुरानी ज़रूर हो लेकिन वो कहते हैं ना...गुण कभी पुराने नहीं होते। ऐसी ही कहानी है देहरादून की छात्रा ज्योतिका की। बीते साल डालनवाला की रहने वाली छात्रा ज्योतिका रुपये निकालने के लिए ईसी रोड में मौजूद बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम पर गई। लेकिन जब ज्योतिका एटीएम के अंदर गई तो एटीएम की स्क्रीन पर कलेक्ट योर कैश लिखा हुआ था। ज्योतिका ने फिर पड़ताल की तो देखा कि कैश विंडो पर दस हजार रुपये फंसे हुए थे। जाहिर सी बात है कि इतना कैश देखकर हर किसी का मन मचल जाता है। लेकिन उस वक्त ज्योतिका ने जो कुछ भी किया..वो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया।

ज्योतिका को पहले तो समझ में नहीं आया कि करना क्या है। दरअसल अभी तक ज्योतिका ने अपना एटीएम कार्ड मशीन में इन्सर्ट भी नहीं किया था। ज्योतिका इस बात को लेकर परेशान थी कि अभी तक कार्ड स्वाइप भी नहीं किया और रकम कहां से आ गई। जाहिर सी बात है कि 10 हजार रुपयों को देखकर किसी की भी नीयत बिगड़ सकती है। लेकिन ज्योतिका को अंदाजा था कि ये रकम किसी और के लिए कितनी ज्यादा जरूरी हो सकती है। ज्योतिका ने इसके तुरंत बाद बैंक ऑफ इंडिया के बल्लूपुर ब्रांच के मैनेजर को दी। बैंक मैनेजर डीसी गैरोला ने ज्योतिका से बातचीत की। इसके बाद ज्योतिका वो सारी रकम लेकर बल्लूपुर के बैंक ऑफ इंडिया पहुंच गई। इसके बाद ज्योतिका ने सारी रकम बैंक को सौंप दी। डीसी गैरोला ने बताया कि हो सकता है कि ज्योतिका से पहले किसी ने रकम निकाली और वो रकम किसी तकनीकि खामी की वजह से एटीएम में ही फंस गई होगी।

यानी प्रोसेस में देरी की वजह से ग्राहक अपना कैश ना निकाल पाया हो। जाहिर सी बात है कि ज्योतिका ने ये पैसे बैंक को वापस लौटाकर ईमानदारी की मिसाल पेश की है। बैंक मैनेजर डीसी गैरोला ने इसक बाद एटीएम के डाटा की छानबीन करवाई और रकम को संबंधित ग्राहक तक पहुंचाया गया। बैंक की तरफ से ज्योतिका की जमकर तारीफ की गई है। इसके साथ ही कहा गया है कि ईमानदार लोग अभी भी हमारे समाज में मौजूद हैं। उत्तराखंड से आपको बार बार ऐसे किस्से सुनने को मिलेंगे, जिनमें ईमानदारी की एक अलग कहानी है। बार बार उत्तराखंड के लोगों ने साबित किया है कि आज भी दुनिया में ईमानदारी जिंदा है। उम्मीद है कि ज्योतिका की ये कहानी आप सभी को बेहद पसंद आएगी। अच्छी कहानियां हर किसी को भाती हैं। शाबाश ज्योतिका...इसी तरह से जिंदगी में ईमानदारी की मिसाल पेश करती रहें।


Uttarakhand News: STORY OF DEHRADUN GIRL JYOTIKA

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