महासू देवता..यहां आज भी निभाई जाती है ‘लोटा नमक’ परंपरा..हर जुबान की कीमत होती है

जौनसार-बावर में आज भी जुबानी संकल्प के लिए लोटा-नमक परंपरा निभाई जाती है...यानि एक बार जो कमिटमेंट कर दिया तो फिर उससे मुकर नहीं सकते।

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सांस्कृतिक विविधता वाला उत्तराखंड अपने आप में कई संस्कृतियों...कई परंपराओं को समेटे हुए है। खासकर यहां का जौनसार-बावर क्षेत्र जो कि सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है, वहां आज भी परंपराओं को खासी तरजीह दी जाती है। परंपराएं यहां की ऐसी धरोहर है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपी जाती है और कोई चाहे कितना ही आधुनिक हो जाए उसे इन परंपराओं को निभाना ही होता है....यही तो पहाड़ की खूबसूरती है। जौनसार-बावर क्षेत्र में वचनबद्धता यानी जुबान की कीमत को लेकर एक खास परंपरा निभाई जाती है...जिसे लोटा-नमक कहा जाता है। ये जुबानी संकल्प है...यानि एक बार जुबान दे दी तो फिर उससे मुकर नहीं सकते। फिर बात चाहे पारिवारिक विवाद की हो या फिर चुनाव की....जौनसार में अगर कोई जुबानी संकल्प लेता है तो फिर उसे निभाता जरूर है। नेता जी भले ही चुनाव के दौरान किए अपने वादे भूल जाते हों, लेकिन जौनसार की जनता जो वादा करती है वो कभी नहीं भूलती और उसे निभाती जरूर है। आगे जानिए इसकी खास बात

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ये क्षेत्र टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट के अंतर्गत आता है। यहां जुबानी संकल्प के लिए 'लोटा-नमक' की परंपरा विशेष महत्व रखती है। चुनाव के मौके पर इस परंपरा का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। लोटा-नमक के दौरान संकल्प लेने वाला व्यक्ति जौनसार-बावर के कुल देवता महासू महाराज को साक्षी मानकर प्रतिज्ञा लेता है- मैं जो वचन दे रहा हूं, उस पर प्राण-प्रण से अटल रहूंगा। अगर मैनें या मेरे परिवार ने वचन तोड़ा तो मेरा और मेरे परिवार का अस्तित्व ठीक उसी तरह समाप्त हो जाएगा, जैसे पानी से भरे लोटे में नमक का हो जाता है। बात दुविधा की हो या फिर संदेह की....किसी भी तरह के विवाद के निपटारे के लिए लोटा-नमक की परंपरा का सहारा लिया जाता है। अटूट विश्वास की ये परंपरा सदियों से चली आ रही है, और इसे तोड़ने की हिमाकत आज तक किसी ने नहीं की। ऐसे वक्त में जब कि लोगों के लिए जुबान-वादों का कोई महत्व नहीं रह गया है...रजिस्ट्री पर लिखी बात तक से लोग मुकर जाते हैं, ऐसे समय में भी जौनसार-बावर में इस परंपरा का बखूबी निर्वहन हो रहा है। ऐसी परंपराएं ही पहाड़ के अस्तित्व को बचाए हुए हैं, और हमें खुद पर गर्व करने का मौका देती हैं।


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