उत्तराखंड: प्रदेश बीजेपी के नए कार्यकारी अध्यक्ष..जानिए नरेश बंसल के बारे में सब कुछ

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल को प्रदेश भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया है। उनके बारे में सब कुछ जानिए

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नरेश बंसल..इन्हें उत्तराखंड में प्रदेश बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वो जाने-माने राजनेताओं में शुमार हैं। वो भारतीय जनता पार्टी उत्तराखण्ड के प्रदेश महामंत्री हैं। खास बात ये है कि उनका लम्बा सामाजिक और राजनैतिक जीवन रहा है। लगभग 45 वर्षो से भी अधिक समय से वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में संगठन के मुताबिक काम कर रहे हैं। खास बात ये है कि वो कुशल नेतृत्व, बेहतर संगठन क्षमता और संगठन पद्धति के मुताबिक हर कार्य करने की क्षमता रखने वाले माने जाते है। नरेश बंसल का जन्म 3 फरवरी को निम्न मध्यम वर्ग के वैश्य परिवार में देहरादून में हुआ। उनके पिता स्व0 लाला हुकुम चन्द मुनीम थे और माता ग्रहणी। आपको जानकर हैरानी होगी 8 साल की आयु में वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में आये और स्वयंसेवक बने। उनकी प्राईमरी शिक्षा नगर पालिका के स्कूल में और इंटरमीडिएट तक की सामान्य हिंदी माध्यम विद्यालय में हुई।

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परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तो पढ़ाई का खर्च को जुटाने के लिये वो लिफाफे बनाने का काम, त्योहारो पर आतिशबाजी, रंगगुलाल एंव राखी आदि बेचने का काम करते थे। इसके साथी ही ट्यूशन पढ़ाकर उन्होंने बाकी की शिक्षा पूर्ण की। 14 वर्ष की आयु में उन्होने संघ का प्राथमिक शिक्षा वर्ग किया तथा बाद में संघ के तृतीय वर्ष (नागपुर) का शिक्षण लिया। डी0ए0वी0 कालेज देहरादून से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी नौकरी लगी और इसके बाद वो घर की आर्थिक स्थिति में अपने पिता की मदद करने लगे। इसके बाद उन्होंने अपने भाई बहनों को पढ़ाया लिखाया और उनका विवाह सम्पन्न कराया। साल 1972 से 1977 तक उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कार्य किया। इसके बाद 1972 में इण्टर काॅलेज छात्र संघ महामंत्री चुने गये। 1972 से 1974 तक वो विद्यार्थी परिशद के नगर कोषाध्यक्ष रहे और 1977 में विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक का दायित्व संभाला। 1975 आपातकाल में नरेश बंसल की सक्रिय भूमिका रही। इस दौरान यानी आपातकाल में संघ का कार्य कैसे बढे इसकी योजना बनाने का काम उन्होंने किया।

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19 नवम्बर 1975 इंदिरा गांधी के जन्मदिवस पर आपातकाल लगाने के विरूद्ध वाॅल राईटिंग और टाईप कराकर पर्चो एंव साहित्यों का उन्होंने वितरण किया। इस दौरान उनका नाम संघ द्वारा प्रकाशित पुस्तक (तानाशाही को चुनौती भाग-2) में प्रकाशित हुआ था। फरवरी 1977 में उन्होंने सिंचाई विभाग में नौकरी छोड़ी और इसके बाद जुलाई 1977 में वे यूको बैंक में नियुक्त हुए। 1977 से 1980 तक उन्होंने नैनीताल जिले के गदरपुर में बैंक की सेवा के साथ-साथ संघ का भी कार्य किया। इसके बाद 1980 से 1986 तक वो हिन्दू जागरण मंच के नगर अध्यक्ष का दायित्व भी संभालते रहे। साल 1991 में उत्तरकाशी की भूकंप त्रासदी को कौन भूल सकता है। इस दौरान नित्यानंद जी के मार्गदर्शन में उन्होंने भूकम्प पीड़ित सहायता समिति के महामंत्री का दायित्व संभाला। अपनी नौकरी से उन्होंने छुट्टी ली और भूकंप पीड़ितों की मदद में जुट गए। इसके बाद उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति का गठन हुआ। जिसमें साल 2011 तक उन्हें महामंत्री का दायित्व दिया गया।

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साल 1992 में बाबरी ढांचा ध्वस्त होने पर उन्होंने अपनी नौकरी से छुट्टी ली और श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन मे सक्रिय भूमिका अदा की। नवम्बर 2000 में उत्तराखण्ड अलग राज्य बना तो उन्होंने अपनी 14 साल की नौकरी छोड़कर समर्पित कार्यकर्ता के रूप में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद से वो लगातार बीजेपी के लिए काम करते रहे और 2012 से 2015 तक प्रदेश महामंत्री भाजपा उत्तराखण्ड का दायित्व निभाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तराखंड में प्रमुख भूमिका निभाई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशाल जनसभाओं का संयोजन किया। इसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी वो भाजपा के स्टार प्रचारक रहे और प्रदेश कार्यालय प्रभारी के रूप में चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई। साल 2019 में त्रिशक्ति सम्मेलन में उन्होंने संयोजक का दायित्व बखूबी निभाया। अब वो बीजेपी प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका अदा कर रहे हैं।


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