फूलदेई के मौके पर देखिए वो गढ़वाली गीत..जिसने उत्तराखंडियों को उत्तराखंड से जोड़ दिया

फूलदेई का त्योहार सामने है और सोशल मीडिया पर फिर से वो गीत वायरल हो रहा है, जिसकी वजह से ये परंपरा एक बार फिर से जीवित हो उठी थी।

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26 फरवरी...साल 2017..सोशल मीडिया पर एक गढ़वाली गीत आया था। ना तो उस गीत को आज तक कोई भूल पाया है और शायद भूल भी नहीं पाएगा। हाथों में रिंगाल को टोकरी और फूल लिए बच्चे आपको वापस बुला रहे थे, फूलदेई के मंगल गीतों की आवाज कानों को अच्छी भी लग रही थी और टीस भी छोड़ रही थी (टीस अपने गांव लौटने की)। वो सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि शब्द, संगीत, संवेदनाओं का ऐसा मायाजाल था...जिसमें हर कोई डूब गया था। हम आज भी कहते हैं कि शुरुआत वहां से कीजिए...जहां से हर किसी को नई शुरुआत मिले। उत्तराखंड की म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए साल 2017 एक तोहफे की तरह था। गांव, शहर, देश, विदेश...जहां भी कोई उत्तराखंडी था...उसने फुलारी गीत जरूर सुना होगा। किसी की आंखों में आंसू आए, किसी का दिल अपनी परंपराओं की तरफ मुड़ा, किसी को गाहे-बगाहे वो त्योहार याद आ गया, कोई वापस अपने गांव की तरफ चल पड़ा।

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वास्तव में ये गीत पांडवाज के लिए एक बड़ा ब्रेक थ्रू साबित हो गया था। यानी ईशान डोभाल, कुणाल डोभाल और सलिल डोभाल की मेहनत रंग लाई थी। क्या आप यकीन कर सकते हैं कि विदेश तक भी फुलारी की महक चली गई थी ? अमेरिका के एशबर्न में उत्तराखंड के लोग फूलदेई का उत्सव मना रहे थे और जुंबा पर था ‘चला फुलारी फूलों को’। चलिए एक बार फिर से ये वीडियो देख लीजिए।

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Uttarakhand News: Phulari song pandavaas

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