उत्तराखंड को फूलदेई की बधाई...गर्व कीजिए..आप दुनिया को प्रकृति के सम्मान की सीख देते हैं

चैत्र सगरांद के साथ फूलदेई का लोकपर्व शुरू हो जाएगा। गढ़वाल, कुमाऊं के साथ-साथ जौनसार में भी ये पर्व खूब उल्लास के साथ मनाया जाता है।

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प्रकृति है तो हम हैं, प्रकृति नहीं तो हम नहीं...उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई हमें यही सीख देता है। फूलदेई पर्व उल्लास का पर्व है, ये हमें बसंत ऋतु के स्वागत के साथ ही प्रकृति का सम्मान करने की भी सीख देता है। पहाड़ में फूल देई, छम्मा देई, देणी द्वार, भर भकार, ये देली बारम्बार नमस्कार, फूले द्वार...गीत की पंक्तियां गाते हुए ये पर्व मनाया जाता है। इन पंक्तियों का मतलब है आपकी दहलीज फूलों से भरी और सबकी रक्षा करने वाली हो, घर और समय सफल रहे, भंडार भरे रहें, इस देहरी को बार-बार नमस्कार, द्वार खूब फूले फले। चैत्र संक्रांति के साथ यानि 15 मार्च से फूलदेई का त्योहार शुरू हो जाएगा। उत्तराखंड के गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार क्षेत्र में फूलदेई पर्व को खूब उल्लास से मनाया जाता है। कुमाऊं और गढ़वाल के ज्यादातर इलाकों में फूलदेई का पर्व 8 दिनों तक मनाया जाता है, वहीं टिहरी में कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां एक महीने तक फूलदेई मनाने की परंपरा है।

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फूलदेई को लेकर बच्चों में खूब उत्साह होता है। फूलदेई से एक दिन पहले शाम को बच्चे रिंगाल की टोकरी लेकर फ्यूंली, बुरांस, आडू, पुलम, खुबानी आदि के फूलों को इकट्ठा करते हैं। अगले दिन सुबह नहाकर वह घर-घर जाकर लोगों की सुख-समृद्धि के पारंपरिक गीत गाते हुए देहरियों में फूल बिखेरते हैं। फूलों के बदले बच्चों को लोग चावल, आटा, गुड़, मिठाई और दक्षिणा दान करते हैं। फूलदेई के अंतिम दिन इस अनाज से प्रसाद बनाया जाता है। देवता को भोग लगाने के बाद सभी को प्रसाद बांटा जाता है। सीएम आवास में इस बार भी फूलदेई पर्व मनाया गया। देखिए वीडियो

#लोकपर्व_फूलदेई

#लोकपर्व_फूलदेई

Posted by Trivendra Singh Rawat on Thursday, March 14, 2019

इस अवसर पर कुमाऊं के कुछ क्षेत्रों में देहरियों पर पारंपरिक ऐपण बनाने की परंपरा भी है। फूलदेई का पर्व हमें सीख देता है कि हम प्रकृति के उपहार को वरदान की तरह अपनाएं और उसका सम्मान करें। हालांकि बदलते समय के साथ-साथ लोकपर्वों की रंगत कुछ फीकी पड़ती जा रही है। इन्हें संजोए रखने की जरूरत है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी इस समृद्ध-गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा सके और उस पर गर्व कर सके।


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