उत्तराखंड शहीद सूर्यकांत: 11 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, होली से पहले गांव में मातम

रुद्रप्रयाग के जखोली बड़मा गांव के रहने वाले सपूत के गांव में होली से पहले ही मातम का माहौल है। परिवार में खामोसी पसरी है।

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उत्तराखंड का एक और लाल कश्मीर के लेह-लद्दाख में शहीद हो गया है। शहीद जवान का नाम सूर्यकांत पंवार है, जो कि रुद्रप्रयाग के रहने वाले थे। जवान सूर्यकांत पंवार कश्मीर के लेह-लद्दाख में ग्लेशियर में फंसने के बाद शहीद हो गए थे। उनके पैतृक गांव जखोली बड़मा गांव में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 11 साल के बेटे अंतरिक्ष ने पिता को मुखाग्नि दी। नन्हें बेटे को पिता को मुखाग्नि देख वहां मौजूद लोग गमगीन हो गए। पिता को खो देने के गम में नन्हें बच्चे बिलख रहे हैं। परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। लोगों ने शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। 35 साल के सूर्यकांत पंवार आईटीबीपी में थे। उनके गांव में जवान सूर्यकांत की मौत की खबर काफी पहले ही पहुंच चुकी थी। गांव के बेटे की मौत से ग्रामीण गमगीन थे। परिजन उनके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे थे। ऋषिकेश से उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव जखोली बड़मा लाया गया, जहां ग्रामीणों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए। यह भी पढें - ‘बिष्ट’ कौन हैं ? जानिए उत्तराखंड के इन राजपूतों की कहानी, गौरवशाली है ये इतिहास !
शहीद को श्रद्धांजलि देने वालों में विधायक भरत चौधरी, डीएम मंगेश घिल्डियाल, एसपी अजय सिंह भी शामिल थे। तिलवाड़ा घाट में शहीद सूर्यकांत पंवार के 11 साल के बेटे अंतरिक्ष ने पिता को मुखाग्नि दी। बता दें कि शहीद सूर्यकांत पंवार आईटीबीपी में लेह-लद्दाख क्षेत्र में तैनात थे। शहीद के परिवार में पत्नी समेत 11 साल का बेटा और 5 साल की बेटी है। शहीद की पत्नी और बच्चे दिल्ली में रहते हैं। जवान सूर्यकांत की मौत के बाद घर में मातम पसरा है। शहीद जवान की मौत की खबर के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद उनकी पत्नी और बच्चे दिल्ली के आरके पुरम में रहते हैं। सूर्यकांत पंवार की उम्र अभी महज 35 साल थी। अभी तो इन आंखों ने कई ख्वाब देखे थे लेकिन क्रूर काल ने सारे ख्वाबों को छीन लिया। गांव में शहीद के बड़े भाई और मां-बाप रहते हैं। बताया जा रहा है कि उनके पिता सरकारी स्कूल के रिटायर्ड टीचर हैं।


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